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Wednesday, 24 February 2016

लोकसभा में स्मृति ईरानी का ऐतिहासिक भाषणः इंदिरा ने भी सत्ता खोई थी लेकिन उनके बेटे ने भारत की बर्बादी के नारों का समर्थन नहीं किया था

रोहित के शव को हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने पर व्यथित हुई केंद्रीय मंत्री 
नई दिल्ली: जेएनयू मामले में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने संसद में बुधवार को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि सत्ता तो इंदिरा गांधी ने भी खोई थी लेकिन उनके बेटे ने भारत की बर्बादी के नारों का समर्थन नहीं किया था। लोकसभा में जेएनयू, हैदराबाद विश्वविद्यालय एवं अन्य उच्च शिक्षण संस्थाओं की स्थिति पर आज हुई विशेष चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए स्मृति ने कहा कि किसी घटना स्थल पर राहुल गांधी दोबारा नहीं जाते लेकिन इस मामले में (हैदराबाद विश्वविद्यालय में दलित छात्र की आत्महत्या) राजनीतिक अवसरवादिता के चलते दो बार गए। कांग्रेस सदस्यों के टोकाटाकी पर स्मृति ने कहा कि क्या अमेठी से चुनाव लडऩे की मुझे सजा दी जा रही है। उल्लेखनीय है कि अमेठी से राहुल गांधी सांसद हैं जिनके खिलाफ पिछले लोकसभा चुनाव में वह भाजपा की उम्मीदवार थी।
राहुल पर प्रहार जारी रखते हुए स्मृति ने कहा कि सत्ता को इंदिरा गांधी ने भी खोई थी लेकिन उस समय उनके बेटे ने भारत की बर्बादी के नारों का समर्थन नहीं किया था। उन्होंने कहा कि अगर राहुल उनसे कहते कि हम दोनों जेएनयू चलते हैं क्योंकि वह जेएनयू जहां के बच्चों ने सीमा पर कुर्बानी दी वहां कुछ लोग आज भारत की बर्बादी के नारे लगा रहे हैं, तो वह खुशी खुशी जातीं। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं कहा। विपक्ष की टोकाटोकी पर उन्होंने व्यंग्य किया कि आप लोग अल्पसंख्यकों की बात करते हैं तो मैं भी यह कह सकती हूं कि मैं एक महिला हूं और अत्यंत सूक्ष्म अल्पसंख्यक वर्ग (पारसी) से आती हूं, इसलिए मुझे नहीं बोलने दे रहे हैं। स्मृति ईरानी ने कहा कि उन्हें हजारों की संख्या में लोगों से अर्जियां मिली हैं और उन्होंने इसका निपटारा किया और किसी से यह नहीं पूछा कि उनकी जाति या धर्म क्या है। विपक्ष खासकर कांग्रेस के आरोपों पर तीखे तेवर अपनाते हुए स्मृति ने कहा कि मुझे पर आरोप लगाये जा रहे हैं कि हैदराबाद विश्वविद्यालय को पत्र क्यों लिखा। कांग्रेस सांसद हनुमंथ राव के कई पत्र मुझे मिले और इसमें कहा गया कि हैदराबाद विश्वविद्यालय में न्याय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी नियत में कोई खोट नहीं थी और इस कारण पत्र लिखा।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एक बच्चे की मृत्यु पर राजनीति की जा रही है। जिस समिति ने दलित बच्चे को बर्खास्त करने की सिफारिश की, उसका गठन कांग्रेस की सरकार के समय हुआ था। अपनी बात रखते हुए कई बार स्मृति बेहद भावुक हो गई और अपनी भावनाओं पर काबू करती दिखीं। उन्होंने कहा कि रोहित के शव का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार की तरह किया गया। उस बच्चे के पास काफी समय तक कोई नहीं गया। उन्होंने सवाल किया कि वहां डाक्टर नहीं पहुंचने पर कौन चिकित्सकीय रूप से इतना कुशल था जिसे वेमुला को मृत घोषित किया।  कांग्रेस विशेष तौर पर राहुल गांधी द्वारा विश्वविद्यालय के कुलपतियों को बदलने जाने के आरोप पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि संप्रग के समय नियुक्त किये गए किसी कुलपति को हटाया नहीं गया है। जेएनयू प्रकरण पर विपक्ष खासकर कांग्रेस के आरोपों के जवाब में स्मृति सदन में काफी दस्तावेज और कागजात लेकर आई थी। उन्होंने कहा कि इनमें ऐसे कागजात है जो गृह मंत्रालय के नहीं बल्कि जेएनयू के सुरक्षा विभाग एवं उस संस्थान के हैं। और इनसे यह बात साबित होती है कि वहां भारत विरोधी और पाकिस्तान समर्थक नारे लगाये गए।