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Monday, 3 August 2015

मुजफ्फरनगर की आवाजः मुजफ्फरनगर में पढ़ा, नोएडा में बार चलाया और प्रयाग में बन गया महामंडलेश्वर

नई दिल्लीः इलाहाबाद में अखाड़ा परिषद ने एक बिल्डर और बीयर बार मालिक को महामंडलेश्वर बनाकर विवाद खड़ा कर दिया। आरोप लग रहे हैं कि पैसों के दम पर बिल्डर सचिन दत्ता को महामंडलेश्वर की पदवी दी गई। हालांकि विवाद बढ़ने पर निरंजनी अखाड़े के सचिव नरेंद्र गिरि ने कहा कि इस मामले की जांच की जाएगी और अगर सचिन कारोबारी गतिविधियों में लिप्त पाए गए तो उनकी पदवी वापस ले ली जाएगी। बता दें, सचिन दत्ता ने अपनी आरंभिक शिक्षा मुजफ्फरनगर के एक स्कूल से ली और बाद में वह नोएडा में बीयर के कारोबार में घुसा।
सचिन दत्ता ऊर्फ महामंडलेश्वर सच्चिदानंद गिरि को अखाड़ा परिषद ने शुक्रवार को इलाहाबाद में पूरे ताम-झाम और रीति-रिवाज के साथ महामंडलेश्वर की पदवी से नवाजा। निरंजनी अखाड़े के सचिव और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि ने खुद सच्चिदानंद का पट्टाभिषेक किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव भी मौजूद थे। शिवपाल सिंह यादव ने तो इस अवसर पर बाकायदा अपने सरकारी हेलीकॉप्टर से फूलों की बारिश भी करवाई लेकिन सचिन के महामंडलेश्वर सच्चिदानंद बनने के अगले ही दिन ये मामला विवादों में आ गया है।
आरोप लगा कि सचिन दत्ता नोएडा के बड़े बिल्डर हैं। नोएडा के सेक्टर 18 में उनका बीयर बार और डिस्को भी है। बालाजी कंस्ट्रक्शंस के नाम से इनका रियल एस्टेट कारोबार है। नोएडा और गाजियाबाद में इनके कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं। सचिन दत्ता के कारोबार से जुड़े होने की खबर आते ही अखाड़ा परिषद बचाव की मुद्रा में आ गया। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि ने कहा कि सच्चिदानंद गिरि के बारे में पूरी पड़ताल की जाएगी और आरोप सही पाए गए तो उनकी पदवी वापस ले ली जाएगी। हालांकि सच्चिदानंद गिरि के समर्थक उनके बचाव में उतर आए हैं। उनका कहना है कि सचिन दत्ता 22 साल की उम्र मंु ही संन्यासी हो गए थे। गाजियाबाद निवासी सचिन अग्नि अखाड़ा के महामंडलेश्वर कैलाशानंद के साथ 20 साल से जुड़े हैं। सचिन को महामंडलेश्वर बनाने की सिफारिश कैलाशानंद और नरेंद्र गिरि ने की थी।
आपको बता दें कि संत समाज में महामंडलेश्वर का पद बहुत ऊंचा और सम्मानित माना जाता है। कुंभ में होने वाले शाही स्नान में महामंडलेश्वर रथ पर सवार होकर निकलते हैं। कुंभ में महामंडलेश्वर के लिए अलग शिविर की व्यवस्था होती है। इनकी सुरक्षा के भी खास इंतजाम किए जाते हैं। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सचिन दत्ता उर्फ सच्चिदानंद गिरि को किन नियमों के तहत अखाड़े का महामंडलेश्वर बनाया गया है। सूत्रों का कहना है कि सचिन पर करोड़ों रुपये का कर्ज है और इन्हीं से बचने के लिए सचिन धर्म का गलत इस्तेमाल कर रहा है। अब देखना ये है कि अखाड़े की जांच में सचिन का कौन सा सच सामने आता है। मीडिया भी इस न्यूज को बढ़ाचढ़ाकर दिखा रहा है।