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Saturday, 6 June 2015

मुजफ्फरनगर सांसद डॉ. संजीव बालियान का एक साल का रिपोर्ट कार्ड- 3

मुजफ्फरनगरः डॉ. संजीव बालियान के एक साल के रिपोर्ट कार्ड को जोरदार रिस्पांस मिला है। पूरे देश में शायद किसी भी सांसद के बारे में इतना विस्तृत ब्यौरा किसी एजेंसी ने तैयार नहीं किया होगा। तीसरी और अंतिम किस्त में हम उनके द्वारा कराए गए कुछ खास विकास कार्यों के बारे में जानेंगे। साथ ही ये भी जानने का प्रयास करेंगे कि उनका राजनीतिक कद जिले की राजनीति के हिसाब से कहां तक पहुंचा हैः-       



     1.    संजीव बालियान के एक साल के कार्यकाल की उपलब्धि को अगर किसी एक कार्य से नापना हो तो वो है मेरठ से लेकर सहारनपुर तक रेलवे लाइन के दोहरीकरण का कार्य। वैसे तो इस लाइन का विद्युतीकरण के साथ ही उच्चीकृत करने का काम कई साल से चल रहा है लेकिन डबल लाइन का काम एक दशक पहले मेरठ में ही आकर रुक गया। मेरठ सिटी स्टेशन से लेकर सहारनपुर के टपरी स्टेशन तक ये लाइन अब भी सिंगल ही है। संजीव बालियान का शुरू से ही दावा रहा था कि वे रेल लाइन को डबल कराकर रहेंगे। कुछ साल पहले डबल लाइन के लिए सर्वे भी हो गया और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने सैद्धांतिक रूप से इसे डबल कराने की बात भी कही थी लेकिन योजना ने मूर्त रूप नहीं लिया था। संजीव बालियान को क्रेडिट इसलिए दिया जा सकता है क्योंकि उनके कार्यकाल में ये काम शुरू हो गया है। डबल लाइन के लिए जमीन को समतल करने का काम तेजी से चल रहा है। अब गंग नहर व अन्य कुछ पुलों का निर्माण होना बाकी है। अगर ये काम संजीव बालियान के पांच साल के कार्यकाल में ही पूरा हो गया तो इसे ऐतिहासिक उपलब्धि कहा जाएगा और वे निश्चित रूप से मुजफ्फरनगर के राजनीतिक इतिहास में याद किए जाते रहेंगे।
       
      2.  संजीव बालियान ने एक और बड़ा बीड़ा उठाया है बुढ़ाना से खतौली मार्ग को बनवाने का। ये मार्ग खतौली से बुढ़ाना कस्बे को जोड़ता है और बजाज शुगर मिल इसी रोड पर स्थित है। दशकों से इस सड़क का बुरा हाल था। ये मेरठ व दिल्ली जाने के लिए वाहनों का शार्ट कट भी था लेकिन इसकी खस्ता हालत की वजह से यहां से वाहन नहीं गुजरते थे। दिन के वक्त भी ये मार्ग इतना सुनसान हो जाता है कि यहां लूटपाट होती हैं। इसके अलावा खतौली व बुढ़ाना शुगर मिल में गन्ना लाने के लिए भी किसानों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। इसका निर्माण कार्य डॉ. संजीव बालियान के तमाम प्रयास व प्राथमिकता के बावजूद शुरू नहीं हो पाया है। ये कार्य भी अगर पांच साल में पूरा हो गया तो बहुत बड़ा काम संजीव के खाते में जाएगा।

       
   3. संजीव बालियान ने अपने लोकसभा क्षेत्र की सभी पांच विधानसभाओं (खतौली, मुजफ्फरनगर, चरथावल, बुढ़ाना व सरधना) में 50-50 लाख रुपये के कार्य कराए हैं लेकिन ये कम हैं। सर्वे में 70 प्रतिशत से अधिक लोगों का ये मानना था कि वे केंद्रीय मंत्री हैं और उन्हें अन्य विभागों से भी यहां विकास कार्य कराने चाहिए। उदाहरण के तौर पर सड़कों के निर्माण, बिजलीघर की स्थापना, कुछ उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना के लिए वे नितिन गडकरी, स्मृति ईरानी व पीयूष गोयल जैसे केंद्रीय मंत्रियों की सहायता क्यों नहीं ले रहे हैं ? लोगों को बातों से लगा कि उन्हें संजीव बालियान से बेहद अपेक्षाएं हैं और अगर वे पूरी नहीं हुई तो उन्हें निराशा होगी।   
 
4.  किसी भी नेता का आकलन इस बात से भी किया जाता है कि उसकी अपनी पार्टी में कैसी स्थिति है। इस मामले में सर्वे करने में टीम को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा। पार्टी नेताओं को दूसरे लोगों के माध्यम से विश्वास में लेकर हमने ये जानने का प्रयास किया तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जिस समय संजीव बालियान को भाजपा ज्वाइन कराई गई थी और फिर वे सांसद बने थे, तो पार्टी की योजना उन्हें वेस्ट यूपी में एक बड़ा जाट चेहरा बनाने की मानी जा रही थी। चौधरी अजित सिंह की तरह से उन्हें पार्टी आगे बढ़ाने की सोच रही थी लेकिन भाजपा में बड़े लेवल पर संजीव बालियान के खिलाफ लॉबिंग जारी है। बागपत के सांसद (अजीत सिंह को हराने वाले) व मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर सत्यपाल सिंह को आगे बढ़ाने के लिए भी पार्टी में एक लॉबी सक्रिय हो गई है। पिछले दिनों जब केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को लेकर भाजपा में बवंडर मचा तो उस समय ये चर्चा भी जोर-शोर से चली कि संभवतः संजीव बालियान का मंत्रालय (कृषि) बदल सकता है या फिर उनके स्थान पर सत्यपाल सिहं को केंद्रीय मंत्री मंडल में वेस्ट यूपी के जाट नेता के रूप में शामिल किया जा सकता है। सत्यपाल सिंह के समर्थकों ने मीडिया में इस तरह से लॉबिंग भी की लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी ने किसी भी प्रकार से बदलाव से इनकार करके इसे खत्म कर दिया। बहरहाल मुजफ्फरनगर जिले की राजनीति में उनकी स्थिति मजबूत है। भाजपा जिलाध्यक्ष सतपाल सिंह उनके कहे अनुसार चलते हैं और संघ में भी उनकी पकड़ है। राजनीतिक लिहाज से उनका कद ठीक-ठाक बन चुका है। उनकी परीक्षा अब यूपी के विधानसभा चुनावों के समय होगी।


 (सर्वे रिपोर्ट में अभी कई और तथ्य ऐसे रह गए हैं जिन पर बात की जा सकती है। आने वाले समय में भी हम इस तरह की रिपोर्ट देते रहेंगे। आशा है आपको ये आयोजन पसंद आएगा। अपना फीडबैक हमें newswave.in@gmail.com पर भेजते रहें। यहां ये भी बता दें कि हमने इस बारे में खुद केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान का इंटरव्यू लेने का प्रयास किया लेकिन उनके स्टाफ ने इसमें सहयोग नहीं किया और कई बार मेल करने व संदेश भेजने के बाद भी इंटरव्यू के लिए मंत्री महोदय समय नहीं निकाल सके। उनकी बात को भी हम यथासंभव समय मिलने पर आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। )