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Thursday, 19 January 2017

यूपी में भाजपा सरकार बनी तो ये होंगे मुख्यमंत्री

भारतीय जनता पार्टी ने यूपी में पहले दो चरणों के लिए प्रत्याशियों की सूची जारी करके अपना अभियान शुरू कर दिया है। वैसे तो बहुत से नाम चौंकाने वाले हैं लेकिन मथुरा की वृंदावन सीट से श्रीकांत शर्मा को टिकट देकर सभी को चौंका दिया है। भाजपा में चर्चा है कि शर्मा सीएम पद के दावेदार हो सकते हैं। आइये नजर डालते हैं बिना किसी चेहरे को घोषित किए यूपी के समर में उतरी भाजपा के संभावित मुख्यमंत्री के नामों पर एक नजर:-

 श्रीकांत शर्मा: 
युवा व पार्टी के राष्ट्रीय मंत्री श्रीकांत शर्मा (46)का जन्म मथुरा में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा भी वहीं हुई और फिर पढ़ाई के लिए दिल्ली आ गए। यहां एबीवीपी से जुड़े और दिल्ली विवि की राजनीति में सक्रिय रहे। कहा जाता है कि उन्हीं की वजह से एबीवीपी की जड़ें डीयू में मजबूत हुई। अमित शाह व अरुण जेतली की निकटता का लाभ उन्हें मिला है। 2014 में वे लोकसभा का चुनाव भी मथुरा से लडऩे वाले थे लेकिन अंत में टिकट हेमा मालिनी को गया था। अब माना जा रहा है कि यदि भाजपा का पूर्ण बहुमत मिलता है तो वे सीएम पद के दावेदार हो सकते हैं। सीएम न भी बने तो उनका कद तो बढऩा तय है।

केशव प्रसाद मौर्य:
इलाहाबाद के मौर्य यूपी में पिछड़ी जाति में भाजपा का चेहरा हैं। माना जा रहा है कि यूपी के पिछड़े मतों को समेटने के लिए मोदी एंड पार्टी ने मौर्य को यूपी प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी थी। वे केवल 47 साल के हैं और फूलपुर लोकसभा सीट से भाजपा के सांसद हैं। मध्य व पूर्वी यूपी के पिछड़े मतों को साधने के अलावा वह अपने व्यक्तित्व के कारण भी सीएम पद का चेहरा माने जा रहे हैं। उन्हें मोदी का समर्थन भी बताया जाता है।

स्मृति ईरानी:
हालांकि अब जबकि यूपी में चुनावी शोर बढ़ रहा है तो स्मृति ईरानी (40) के नाम की चर्चा कुछ कम सुनाई दे रही है लेकिन मोदी की विश्वस्त ईरानी को हमेशा से ही यूपी में भाजपा के भविष्य के चेहरे के रूप में देखा जाता है। टीवी एक्ट्रेस से भाजपा में प्रवेश, महिला मोर्चे की अध्यक्ष, अमेठी में राहुल गांधी के सामने चुनाव लडऩा और फिर केंद्र में एचआरडी मंत्रालय की मिनिस्टर बना दिए जाने तक स्मृति ईरानी का सफर बहुत ही स्वप्निल रहा है। हालांकि उन्हें विवादों के बाद एचआरडी मंत्रालय से हटना पड़ा लेकिन जब राहुल गांधी से मुकाबले की आती है तो वे अमेठी कूच कर जाती हैं। इसलिए उनका नाम भी यूपी के संभावित सीएम के लिए देखा जाता रहा है।

राजनाथ सिंह:
केंद्रीय गृह मंत्री ओर यूपी के पूर्व सीएम राजनाथ सिंह (65) का नाम हमेशा ही उत्तर प्रदेश के बड़े नेता के रूप में लिया जाता है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे हैं और उन्हें अटल, अडवाणी और कल्याण सिंह की श्रेणी का नेता माना जाता रहा है। अक्सर खबरें आती हैं कि यूपी में भले ही भाजपा ने सीएम पद के लिए किसी चेहरे को सामने नहीं रखा है लेकिन जरूरत पड़ी तो राजनाथ सिंह को बड़ी आसानी से वहां के मुख्यमंत्री के सांचे में फिट किया जा सकता है। हालांकि यूपी का होने के कारण राजनाथ सिंह के खिलाफ भाजपा में एक लॉबी उनका विरोध भी करती रही है लेकिन इसमें जरा भी शक नहीं कि लखनऊ से सांसद राजनाथ सिंह यूपी में भाजपा का सबसे बड़ा नाम हैं।

योगी आदित्यनाथ:
कट्टर हिंदूवादी चेहरा गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ (44) का रिकार्ड सबसे मजबूत है। 1998 से लगातार भाजपा के सांसद हैं। गोरखपुर व पूर्वांचल में उनकी जबर्दस्त पकड़ है। गढ़वाल में जन्मे आदित्यनाथ गोरखपुर के महंत अवैद्यानाथ के उत्तराधिकारी व गोरखपुर मठ के प्रमुख हैं। हिंदू युवा वाहिनी के संस्थापक हैं। आक्रामक हैं। जब वह पहली बार संसद गए थे तो केवल 26 साल के थे। राजपूत परिवार से हैं और उनका असली नाम अजय सिंह है। कई बार वे अपनी इच्छा भी जाहिर कर सकते हैं। हालांकि भगवाधारी को भाजपा सीएम पद नहीं देना चाहेगी लेकिन मुख्यमंत्री पद के लिए उनका नाम लगातार फिजाओं में तैरता रहा है।

वरूण गांधी:
केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के बेटे वरूण गांधी (36) सीएम पद के लिए नामों में सबसे युवा हैं। कहा जाता है कि मेनका गांधी का केंद्रीय नेतृत्व से अक्सर इसी बात लेकर मतभेद रहता है कि उनके बेटे को यूपी में सीएम पद के लिए उम्मीदवार क्यों नहीं बनाया जा रहा। अब चूंकि बिना किसी चेहरे को सामने लाए भाजपा चुनाव लड़ रही है तो वरुण के सीएम प्रत्याशी बनने की संभावना बनी रहेगी। वैसे सुल्तानपुर के सांसद वरुण के नाम पर पार्टी में आम सहमति का अभाव है। उनके नाम से गांधी सरनेम जुड़ा होना भी उनके खिलाफ जाता है। भाजपा का एक वर्ग नहीं चाहता कि कांग्रेस की तरह यहां भी गांधी परिवार को बढ़ावा दिया जाए।