जनता की नजर में उन्होंने नहीं कराए विकास कार्य
अपने इलाकों से गायब रहने के लगाए लोगों ने आरोप
हाल ही में संगीत सोम जब अपने क्षेत्र में भ्रमण कर रहे थे तो एक गांव में दलित समाज के लोगों ने उन पर आरोप लगाया कि वे पांच साल से उनके गांव में आकर नहीं झांके। न कोई काम कराया। इस पर संगीत सोम के गुर्गों ने उस व्यक्ति की पिटाई कर दी। सोम के दो समर्थकों के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट भी कराई गई है। संगीत ने 2009 के चुनाव में मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। वे धन बल से चुनाव लड़ते हैं। इसके अलावा वे मुजफ्फरनगर दंगे के समय भड़काऊ भाषण देने व वीडियो शेयर करने के मामले में भी आरोपी रहे हैं। उनकी छवि इलाके में बेहद खराब है।
सर्वे के मुताबिक अंक (10 में से)
संगीत सोम-
विकास कार्य कराने में 2
लोगों से संपर्क में 3
व्यक्तिगत छवि 2
कुछ ऐसी ही हालत खतौली के विधायक करतार सिंह भड़ाना की है। भड़ाना का कहानी भी मनी गेम पर आधारित है। उनके बारे में कहा जाता है कि वे कुछ सीटों को चुनते हैं और फिर उनके नाम की पर्ची डालते हैं। जहां की भी पर्ची निकल आती है उसी सीट से लड़ते हैं। दल कोई भी हो फर्क नहीं पड़ता। पिछली बार उन्होंने मुजफ्फरनगर की गुर्जर बहुल खतौली विधानसभा को चुना था तो इस बार उनका इरादा बागपत विधानसभा से चुनाव लड़ने का इरादा है। रालोद के पास वैसे भी प्रत्याशियों की कमी है। भड़ाना पैसे के बल पर चुनाव कैसे जीता जाता है यह भली भांति जानते हैं। वैसे बागपत से पहले वे उत्तराखंड की लक्सर सीट पर भी लड़ने की सोच रहे थे लेकिन वहां के दबंग भाजपा विधायक से डरकर यहां भाग आए। भड़ाना का स्टाइल कुछ ऐसा है। उनकी टीम पहले ही क्षेत्र में फैल जाती है और हर गांव में कुछ लोगों को चुनकर उनके माध्यम से मनी मैनेजमेंट करती है। वे मूल रूप से फरीदाबाद के रहने वाले हैं और वहीं से सब हैंडल करते हैं। चुनाव के समय आते हैं और फिर गायब हो जाते हैं। पांच साल वे कहां रहे खतौली में कोई नहीं जानता। उनका घर तक नहीं था खतौली में। चुनाव के समय में भी उनका डेरा मेरठ में रहता था। वहीं के होटल में वे रुकते थे। जब भी कोई सभा करानी होती थी तो फरीदाबाद से बसों में भरकर किराए की भीड़ ले आते थे। बाकी सब जाएं भाड़ में। देखना है कि बागपत में भी उनका दांव चलता है या नहीं। वे जाट, गुर्जर व मुस्लिम मतों के दम पर हैं।
सर्वे के मुताबिक अंक (10 में से)
करतार भड़ाना -
विकास कार्य कराने में 0
लोगों से संपर्क में 1
व्यक्तिगत छवि 3
अपने इलाकों से गायब रहने के लगाए लोगों ने आरोप
मुजफ्फरनगर/मेरठः हाल ही में न्यूजवेव के किए गए एक सर्वे में यह सामने आया है कि मुजफ्फरनगर जिले की खतौली विधानसभा सीट से विधायक करतार सिंह भड़ाना (रालोद) व मेरठ की सरधना सीट से विधायक ठाकुर संगीत सिंह सोम (भाजपा) वेस्ट यूपी के सबसे निकम्मे विधायकों में से एक हैं। इन लोगों को इस बार चुनाव में भारी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। संगीत सोम को उनके क्षेत्र के मतदाताओं ने 10 में से 2 अंक दिए हैं। जबकि करतार सिंह भड़ाना को 3 अंक मिले।
हाल ही में संगीत सोम जब अपने क्षेत्र में भ्रमण कर रहे थे तो एक गांव में दलित समाज के लोगों ने उन पर आरोप लगाया कि वे पांच साल से उनके गांव में आकर नहीं झांके। न कोई काम कराया। इस पर संगीत सोम के गुर्गों ने उस व्यक्ति की पिटाई कर दी। सोम के दो समर्थकों के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट भी कराई गई है। संगीत ने 2009 के चुनाव में मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। वे धन बल से चुनाव लड़ते हैं। इसके अलावा वे मुजफ्फरनगर दंगे के समय भड़काऊ भाषण देने व वीडियो शेयर करने के मामले में भी आरोपी रहे हैं। उनकी छवि इलाके में बेहद खराब है।
सर्वे के मुताबिक अंक (10 में से)
संगीत सोम-
विकास कार्य कराने में 2
लोगों से संपर्क में 3
व्यक्तिगत छवि 2
कुछ ऐसी ही हालत खतौली के विधायक करतार सिंह भड़ाना की है। भड़ाना का कहानी भी मनी गेम पर आधारित है। उनके बारे में कहा जाता है कि वे कुछ सीटों को चुनते हैं और फिर उनके नाम की पर्ची डालते हैं। जहां की भी पर्ची निकल आती है उसी सीट से लड़ते हैं। दल कोई भी हो फर्क नहीं पड़ता। पिछली बार उन्होंने मुजफ्फरनगर की गुर्जर बहुल खतौली विधानसभा को चुना था तो इस बार उनका इरादा बागपत विधानसभा से चुनाव लड़ने का इरादा है। रालोद के पास वैसे भी प्रत्याशियों की कमी है। भड़ाना पैसे के बल पर चुनाव कैसे जीता जाता है यह भली भांति जानते हैं। वैसे बागपत से पहले वे उत्तराखंड की लक्सर सीट पर भी लड़ने की सोच रहे थे लेकिन वहां के दबंग भाजपा विधायक से डरकर यहां भाग आए। भड़ाना का स्टाइल कुछ ऐसा है। उनकी टीम पहले ही क्षेत्र में फैल जाती है और हर गांव में कुछ लोगों को चुनकर उनके माध्यम से मनी मैनेजमेंट करती है। वे मूल रूप से फरीदाबाद के रहने वाले हैं और वहीं से सब हैंडल करते हैं। चुनाव के समय आते हैं और फिर गायब हो जाते हैं। पांच साल वे कहां रहे खतौली में कोई नहीं जानता। उनका घर तक नहीं था खतौली में। चुनाव के समय में भी उनका डेरा मेरठ में रहता था। वहीं के होटल में वे रुकते थे। जब भी कोई सभा करानी होती थी तो फरीदाबाद से बसों में भरकर किराए की भीड़ ले आते थे। बाकी सब जाएं भाड़ में। देखना है कि बागपत में भी उनका दांव चलता है या नहीं। वे जाट, गुर्जर व मुस्लिम मतों के दम पर हैं।
सर्वे के मुताबिक अंक (10 में से)
करतार भड़ाना -
विकास कार्य कराने में 0
लोगों से संपर्क में 1
व्यक्तिगत छवि 3
