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Monday, 3 August 2015

सरकार ने 857 अश्लील वेबसाइटों पर रोक लगाई

नेट सामग्री को लेकर ओम्बड्समैन की नियुक्ति की योजनानई दिल्ली: सरकार ने 857 अश्लील वेबसाइटों पर रोक लगाने का आदेश दिया है और साइबर सामग्री संबंधी मुद्दों को देखने के लिये ओम्बड्समैन की नियुक्ति की उसकी योजना है। इसके साथ ही देश में इंटरनेट सेंसरशिप और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। एक अधिकारी ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने इंटरनेट सेवा प्रदाताओं से 857 अश्लील वेबसाइटों पर रोक लगाने को कहा है। हालांकि, उसने कहा कि शीर्ष अदालत के अंतिम आदेश आने तक यह अस्थाई उपाय है।
निर्णय के पीछे कारणों के बारे में बताते हुए अधिकारी ने कहा कि सरकार ने केवल उच्चतम न्यायालय के निर्देश का पालन किया है। न्यायालय ने अश्लील वेबसाइट्स खासकर बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्रियों पर रोक लगाने को कहा है। हालांकि, उसने यह भी कहा कि चूंकि मामला बेहद जटिल है, ऐसे में गैर-सरकारी संगठनों, समाज, अभिभावक समूह, बच्चों को परामर्श देने वालों, आईएसपी तथा सरकार को शामिल कर मामले को विस्तार से सुना जाए और सभी के विचारों को जानने के बाद न्यायालय अपना दिशानिर्देश दे।
सरकार का मानना है कि जब मामले में समुचित दिशानिर्देश आएगा, इससे देश में स्वास्थ्यवद्र्धक स्थिर तत्व तैयार होंगे। अधिकारी ने कहा कि सरकार को इस पूरी प्रक्रिया से अलग रखा जाना चाहिए। राष्ट्रीय सुरक्षा,आतंकवाद, उग्रवाद, सांप्रदायिकता के मामले में अंतिम रूप से निर्णय का अधिकार सरकार के पास होगा, टीवी ओम्बड्समैन की तरह ओम्बड्समैन को इस बारे में निर्णय करने दीजिए। अधिकारी के अनुसार ओम्बड्समैन उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या नागरिक समाज का कोई व्यक्ति हो सकता है। सभी संबद्ध पक्ष साइबर सामग्री संबंधी मुद्दों के बारे में नियामकीय प्रणाली के संदर्भ में अपने विचार दे सकते हैं। इस बीच, इस निर्णय को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गयी है। कई लोगों ने इसे इंटरनेट पर सेंसरशिप करार दिया है। उल्लेखनीय है कि आठ जुलाई को सरकार ने उच्चतम न्यायालय को भरोसा दिलाया था कि ऐसी वेबसाइटों पर रोक लगाने के लिये सभी संभव कदम उठाये जाएंगे।