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Wednesday, 21 March 2018

कैराना उपचुनाव : बसपा उतारेगी प्रत्याशी, सपा करेंगी समर्थन- किसे मिलेगा टिकट ?


लखनऊ/शामली: अगले साल होने वाले आम चुनाव से पहले सपा व बसपा की दोस्ती का एक एसिड टेस्ट कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में होने जा रहा है। खबर है कि फूलपुर व गोरखपुर लोकसभा सीटों के उपचुनाव में भाजपा को हराने के बाद सपा-बसपा का अघोषित गठबंधन कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में हाथ आजमाएगा, लेकिन इस बार मैदान में प्रत्याशी बसपा के बैनर पर उतारा जाएगा। 

फूलपुर व गोरखपुर सीटें सपा के खाते में गई थी। सपा राज्यसभा चुनाव में भी बसपा प्रत्याशी अंबेडकर का समर्थन कर रही है। फरवरी में वेस्ट यूपी के दिग्गज भाजपा नेता बाबू हुकुम सिंह के निधन के बाद कैराना लोकसभा सीट खाली हो गई थी। अब 2019 के आम चुनाव से पहले यूपी में कैराना ही एकमात्र लोकसभा सीट है जहां पर उपचुनाव होने जा रहा है। 

हालांकि बसपा कभी उपचुनाव नहीं लड़ती है लेकिन सुनने में आया है कि मायावती ने अखिलेश यादव की परीक्षा लेने के लिए कैराना से अपना प्रत्याशी उतारने का फैसला किया है। यहां ये भी जान लेना जरूरी है कि हुकुम सिंह से पहले कैराना (शामली जिला) से सांसद बसपा की तबस्सुम बेगम ही थी। बेगम ने खुद को सक्रिय राजनीति से दूर करते हुए बेटे नाहिद हसन को कमान सौंप दी है। नाहिद सपा के बैनर पर कैराना से दो बार लगातार विधायक बन चुके हैं।

विधानसभा चुनाव के बाद की तस्वीर-कैराना लोकसभा सीट में शामली जिले की थानाभवन, कैराना व शामली विधानसभा सीटों के अलावा निकटवर्ती सहारनपुर जिले के गंगोह व नकुड़ विधानसभा सीटें भी आती हैं। यहां कैराना को छोड़कर बाकी पर भाजपा के विधायक हैं। अगर वोटों का समीकरण देखें तो इन सीटों पर भाजपा को 2017 में 4.33 लाख वोट मिले थे। बसपा प्रत्याशियों को 2.08 लाख व सपा के 3 प्रत्याशियों को 1.6 लाख वोट मिले थे। सपा ने शामली व नकुड़ सीटें कांग्रेस को दे दी थी। अब बसपा दम भर रही है कि सपा के समर्थन से वह सीट निकाल सकती है।

लोकसभा चुनाव के नतीजे-
आंकड़ों में थोड़ा और पीछे जाएं तो 2014 के लोकसभा चुनाव में कैराना सीट पर हुकुम सिंह ने 56590 लाख वोट हासिल किए थे। दूसरे स्थान पर सपा के नाहिद हसन (329081), तीसरे पर बसपा के कंवर हसन (160414) व चौथे स्थान पर रालोद के करतार सिंह भड़ाना (42706) रहे थे। हालांकि हुकुम सिंह को हराने के लिए अजित सिंह ने गुर्जर प्रत्याशी को मैदान में उतारा था लेकिन वे ज्यादा वोट नहीं काट सके और मुस्लिम मतों में विभाजन का फायदा उठाकर हुकुम सिंह बाजी मार गए थे। 

अब क्या बनेगा गणित-
कैराना लोकसभा सीट पर जातीय समीकरणों की बात करें तो यहां मुस्लिम, गुर्जर, दलित व जाट मतों का बोलबाला है। हुकुम सिंह के लोकसभा में चले जाने के बाद जब कैराना विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ तो नाहिद हसन सपा से विधायक चुन लिए गए थे। उन्होंने हुकुम सिंह के भतीजे अनिल चौहान को हराया था। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में नाहिद ने हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को हराया था। फिलहाल बसपा में मंथन इस बात को लेकर चल रहा है कि टिकट किसे दिया जाए? कंवर हसन का विरोध उनके भतीजे नाहिद हसन (कैराना से वर्तमान सपा विधायक) ही करेंगे। चूंकि नाहिद अब सपा में जा चुके हैं तो उनकी मां तबस्सुम बेगम (कैराना की पूर्व सांसद व मरहूम सांसद मुनव्वर हसन की बेवा) को बसपा टिकट दे नहीं सकती। ऐसे में बसपा किसी नए नाम पर दांव खेल सकती हैं।

Monday, 22 June 2015

यूपी के मृत पत्रकार के परिजनों को मिलेगी 30 लाख की सहायता, दोनों बच्चों को सरकारी नौकरी

अखिलेश ने कहा- मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी

अखिलेश यादव व डिंपल यादव ने प्रतिभाशाली बच्चों को लखनऊ में पुरस्कार दिए और आर्थिक सहायता के प्रति आश्वस्त किया। 
लखनऊः उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में हाल में एक पत्रकार की कथित तौर पर जलाकर हत्या किये जाने के मामले में उ'चतम न्यायालय द्वारा राज्य तथा केन्द्र सरकार को आज नोटिस जारी किये जाने के बीच मृत पत्रकार के पिता और बेटे ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की। राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने यहां बताया कि मुख्यमंत्री शाहजहांपुर में इस माह के शुरू में संदिग्ध परिस्थितियों में जलने के बाद मरे पत्रकार जगेन्द्र के पिता सुमेर सिंह तथा बेटे से मुलाकात की और न्याय का भरोसा दिलाने के साथ-साथ पीडि़त परिवार को 30 लाख रपये की मदद तथा पत्रकार के दोनों ब'चों को सरकारी नौकरी दिलाने की घोषणा की।
अखिलेश ने पत्रकार के परिजन को इंसाफ का भरोसा दिलाते हुए कहा कि प्रकरण की निष्पक्ष जांच होगी। बरेली के पुलिस महानिरीक्षक को मामले की जांच सौंपी गयी है। दोषी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि परिवार की सुरक्षा की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करायी जाएगी। प्रवक्ता के मुताबिक मुलाकात के दौरान मृतक पत्रकार के परिजन ने उनकी जमीन पर हुए कब्जे की जानकारी देते हुए इस दिक्कत के निदान का अनुरोध किया। इस पर मुख्यमंत्री ने शाहजहांपुर के जिलाधिकारी को इस सम्बन्ध में निर्देश दिया कि जमीन की पैमाइश करवाकर वास्तविक स्वामी को जमीन उपलब्ध करायी जाए।
मृत पत्रकार जगेन्द्र के पिता सुमेर सिंह ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद कहा कि हमारी तीन मांगें थी- आर्थिक सहायता, बच्चे की नौकरी और न्याय। मुख्यमंत्री तीनों मांगें मानी। हमें खुशी हैं कि मुख्यमंत्री ने हमारी बात मानीं।
गौरतलब है कि जगेंद्र को गत एक जून को शाहजहांपुर में सदर बाजार इलाके की आवास विकास कालोनी स्थित उनके घर पर पुलिस की छापेमारी के दौरान कथित तौर पर आग लगा दी गई थी और आठ जून को उनकी मौत हो गई थी। पत्रकार के बेटे पुष्पेन्द्र की शिकायत पर पुलिस ने प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री राममूर्ति वर्मा और तत्कालीन थाना प्रभारी समेत कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया

उच्चतम न्यायालय ने पत्रकार की कथित तौर पर जलाकर हत्या किए जाने के मामले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर दायर याचिका पर आज केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। न्यायमूर्ति एम. वाई. इकबाल और न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा की पीठ ने केंद्र और अन्य पक्षों से कहा कि वे दो सप्ताह के भीतर अपने जवाब दाखिल करें। यह पीठ दिल्ली के पत्रकार सतीश जैन की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में पत्रकार के हत्या के मामले की जांच अदालत की निगरानी में सीबीआई से कराने की मांग की गई है।