नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से पूर्व सांसद जगदीश राणा भाजपा में शामिल हो गए। उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रमुख केशव प्रसाद मौर्य और बीजेपी के राष्ट्रीय मंत्री श्रीकांत शर्मा की मौजूदगी में राणा ने विधिवत रूप से बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की। राणा को इस साल की शुरूआत में बसपा से निकाल दिया गया था। पूर्व लोकसभा सदस्य समाजवादी पार्टी में भी रह चुके हैं और मुलायम के नेतृत्व वाली यूपी सरकार में मंत्री थे। उन्होंने 2009 में सहारनपुर सीट से काजी रसीद मसूद को हराया था और सांसद बने थे। राज्य में अगले साल की शुरूआत में चुनाव होंगे और राणा के पार्टी में आने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा को ताकत मिलेगी। उन्होंने कहा कि मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकासात्मक राजनीति में विश्वास करता हूं और भाजपा के लिए काम करना चाहता हूं। इस मौके पर यूपी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सपा और बसपा भ्रष्टाचार का पर्याय बन गए हैं और सत्ता में आने पर भाजपा राज्य को विकास के पथ पर अग्रसर करेगी। राणा के भाजपा में आने से सहारनपुर के कई भाजपा नेता परेशान हैं। खासतौर से वे लोग जो विधानसभा टिकट की लाइन में हैं। माना जा रहा है कि राणा को भी टिकट दिया जाएगा।
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Monday, 23 May 2016
Sunday, 22 May 2016
यूपी मिशन 2017: जानिये किस पार्टी में क्या हो रहा है
सहारनपुर की रैली से मोदी फूकेंगे 26 मई को बिगुल
नई दिल्लीः पांच राज्य के विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद लिटमस टेस्ट माने जाने वाले उत्तरप्रदेश के 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए तैयारियां शुरू हो गई है । भाजपा 26 मई को प्रधानमंत्री की सहारनपुर रैली से इसकी शुरूआत कर सकती है तो कांग्रेस चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को जोड़ते हुए अपनी चुनावी मुहिम को आगे बढ़ा रही हैै। वहीं सपा मुलायम सिंह यादव के मार्गदर्शन एवं राज्य के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व में फिर सत्ता हासिल करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ रही है।
बसपा की चुनावी रणनीति पूरी तरह से मायावती के इर्द गिर्द है और आसन्न विधानसभा चुनाव में वह फूंक फूंक कर कदम उठा रही ताकि 2014 के लोकसभा चुनाव जैसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़े जब पार्टी को एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हुई थी। चुनाव तैयारियों के तहत मायावती स्वयं जिला एवं मंडल स्तर पर तैयारियों की समीक्षा कर रही है । उन्होंने हाल ही में वर्तमान विधायकों को फिर से टिकट देने का आश्वासन दिया और दलितोंं से एकजुट होने का आह्वान करते हुए आरोप लगाया कि सपा और भाजपा दोनों की नीयत में खोट है और वे दलितों का भला नहीं कर सकते।
उत्तरप्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा ने जून के दूसरे सप्ताह में इलाहाबाद में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक आयोजित करने का कार्यक्रम तय किया है। इलाहाबाद कभी कांग्रेस का गढ माना जाता था और अभी यह धार्मिक, सांस्कृतिक केंद्र के रूप में जाना जाता है। 26 मई को ही भाजपा की केंद्र सरकार के 2 साल पूरे हो रहे हैं । इसी कारण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तरप्रदेश को रैली के लिये चुना है और राजनीतिक गलियारों में ये कयास लगाया जा रहे हैं कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी शंखनाद करेगी । राज्यसभा में बहुमत के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में भाजपा अपनी जीत सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोडऩा चाहती।
भाजपा के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि भाजपा भ्रष्ट्राचार मुक्त और अराजकता मुक्त देश और उत्तरप्रदेश को संकल्पित है। हम देश को विकास के पथ पर अग्रसर करना चाहते हैं। '' सपा हो या बसपा... दोनों में भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी को लेकर प्रतिस्पर्धा है और उत्तप्रदेश की जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। नकवी ने कहा कि उत्तरप्रदेश में चाहे सपा का शासन रहा हो या बसपा का... प्रदेश विकास से दूर ही रहा है। उत्तरप्रदेश में भाजपा की सबसे बड़ी चुनौती मुलायम सिंह यादव की सपा और मायावती की बसपा है। मुलायम सिंह की पार्टी पिछड़ा और मुस्लिम वोटबैंक को आगे बढ़ाने की रणनीति पर चल रही है। साथ ही वह ठाकुर मतों को साथ जोडऩे की पहल कर रही है। इसी रणनीति के तहत पार्टी अमर सिंह को राज्यसभा भेज रही है।
मायावती की पार्टी बसपा के साथ पिछले दो दशकों से पिछड़े वर्ग के मतदाताओं का बहुत बड़ा हिस्सा गोलबंद रहा है हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव में यह स्थिति नहीं रही थी। भाजपा ने कई कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तैयार की है । इसके तहत 26 से 31 मई तक पार्टी 'विकास पर्व सप्ताह' मनायेगी जिसमें पार्टी के सांसद विभिन्न जिलों में चौपाल का आयोजन करेंगे। उत्तरप्रदेश में सपा और बसपा के अलावा पार्टी में गुटबाजी को प्रमुख चुनौती माना जा रहा है । कई प्रमुख नेताओं के अलग अलग गुट उभरते रहे हैं। ऐसे में असम की तरह से उत्तरप्रदेश में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करना बहुत बड़ी चुनौती है। हाल के दिनों में राज्य में भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में स्मृति ईरानी के नाम पर अटकलें सामने आई । ऐसी भी खबरे आई कि प्रशांत किशोर ने कांग्रेस की तरफ से प्रियंका गांधी के नाम की वकालत की है।
उत्तरप्रदेश प्रदेश भाजपा अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सपा के शासनकाल में गुंडागर्दी का दौर रहा, कानून एवं व्यवस्था की स्थिति ने लोगों को पूरी तरह से निराश किया । युवाओ को छलने का काम किया । किसान पूरी तरह से परेशान है । बुंदेलखंड के अधिकांश क्षेत्र में राहत राशि प्रदेश सरकार ने बांटी ही नहीं। राज्य का विकास ठप्प पड़ गया है।
वर्ष 2017 में होने वाला उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव अहम माना जा रहा है क्योंकि यहीं से 2019 के लोकसभा चुनाव का रास्ता भी तय हो सकता है। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री ने कहा कि उत्तरप्रदेश को आगे बढ़ाने में किसानों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। किसानों को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने राज्य को हर तरह से भरपूर मदद दी । लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उत्तरप्रदेश में धन का सदुपयोग नहीं हो सका । बुंदेलखंड के बारे में एक सवाल के जवाब में नकवी ने कहा कि केंद्र सरकार ने बुंदेलखंड के लिए विशेष पैकेज दिया । अब राज्य सरकार पर निर्भर करता है कि वह धन का कितना सदुपयोग करती है। उत्तरप्रदेश में जदयू ने भी अपना अभियान शुरू कर दिया है और प्रधानमंत्री के लोकसभा क्षेत्र वाराणसी में हाल ही में नीतीश कुमार की रैली भी हुई । इसके अलावा पूरे प्रदेश में जदयू ने सम्पर्क अभियान शुरू करने की बात कही है।
नई दिल्लीः पांच राज्य के विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद लिटमस टेस्ट माने जाने वाले उत्तरप्रदेश के 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए तैयारियां शुरू हो गई है । भाजपा 26 मई को प्रधानमंत्री की सहारनपुर रैली से इसकी शुरूआत कर सकती है तो कांग्रेस चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को जोड़ते हुए अपनी चुनावी मुहिम को आगे बढ़ा रही हैै। वहीं सपा मुलायम सिंह यादव के मार्गदर्शन एवं राज्य के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व में फिर सत्ता हासिल करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ रही है।
बसपा की चुनावी रणनीति पूरी तरह से मायावती के इर्द गिर्द है और आसन्न विधानसभा चुनाव में वह फूंक फूंक कर कदम उठा रही ताकि 2014 के लोकसभा चुनाव जैसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़े जब पार्टी को एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हुई थी। चुनाव तैयारियों के तहत मायावती स्वयं जिला एवं मंडल स्तर पर तैयारियों की समीक्षा कर रही है । उन्होंने हाल ही में वर्तमान विधायकों को फिर से टिकट देने का आश्वासन दिया और दलितोंं से एकजुट होने का आह्वान करते हुए आरोप लगाया कि सपा और भाजपा दोनों की नीयत में खोट है और वे दलितों का भला नहीं कर सकते।
उत्तरप्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा ने जून के दूसरे सप्ताह में इलाहाबाद में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक आयोजित करने का कार्यक्रम तय किया है। इलाहाबाद कभी कांग्रेस का गढ माना जाता था और अभी यह धार्मिक, सांस्कृतिक केंद्र के रूप में जाना जाता है। 26 मई को ही भाजपा की केंद्र सरकार के 2 साल पूरे हो रहे हैं । इसी कारण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तरप्रदेश को रैली के लिये चुना है और राजनीतिक गलियारों में ये कयास लगाया जा रहे हैं कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी शंखनाद करेगी । राज्यसभा में बहुमत के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में भाजपा अपनी जीत सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोडऩा चाहती।
भाजपा के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि भाजपा भ्रष्ट्राचार मुक्त और अराजकता मुक्त देश और उत्तरप्रदेश को संकल्पित है। हम देश को विकास के पथ पर अग्रसर करना चाहते हैं। '' सपा हो या बसपा... दोनों में भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी को लेकर प्रतिस्पर्धा है और उत्तप्रदेश की जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। नकवी ने कहा कि उत्तरप्रदेश में चाहे सपा का शासन रहा हो या बसपा का... प्रदेश विकास से दूर ही रहा है। उत्तरप्रदेश में भाजपा की सबसे बड़ी चुनौती मुलायम सिंह यादव की सपा और मायावती की बसपा है। मुलायम सिंह की पार्टी पिछड़ा और मुस्लिम वोटबैंक को आगे बढ़ाने की रणनीति पर चल रही है। साथ ही वह ठाकुर मतों को साथ जोडऩे की पहल कर रही है। इसी रणनीति के तहत पार्टी अमर सिंह को राज्यसभा भेज रही है।
मायावती की पार्टी बसपा के साथ पिछले दो दशकों से पिछड़े वर्ग के मतदाताओं का बहुत बड़ा हिस्सा गोलबंद रहा है हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव में यह स्थिति नहीं रही थी। भाजपा ने कई कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तैयार की है । इसके तहत 26 से 31 मई तक पार्टी 'विकास पर्व सप्ताह' मनायेगी जिसमें पार्टी के सांसद विभिन्न जिलों में चौपाल का आयोजन करेंगे। उत्तरप्रदेश में सपा और बसपा के अलावा पार्टी में गुटबाजी को प्रमुख चुनौती माना जा रहा है । कई प्रमुख नेताओं के अलग अलग गुट उभरते रहे हैं। ऐसे में असम की तरह से उत्तरप्रदेश में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करना बहुत बड़ी चुनौती है। हाल के दिनों में राज्य में भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में स्मृति ईरानी के नाम पर अटकलें सामने आई । ऐसी भी खबरे आई कि प्रशांत किशोर ने कांग्रेस की तरफ से प्रियंका गांधी के नाम की वकालत की है।
उत्तरप्रदेश प्रदेश भाजपा अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सपा के शासनकाल में गुंडागर्दी का दौर रहा, कानून एवं व्यवस्था की स्थिति ने लोगों को पूरी तरह से निराश किया । युवाओ को छलने का काम किया । किसान पूरी तरह से परेशान है । बुंदेलखंड के अधिकांश क्षेत्र में राहत राशि प्रदेश सरकार ने बांटी ही नहीं। राज्य का विकास ठप्प पड़ गया है।
वर्ष 2017 में होने वाला उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव अहम माना जा रहा है क्योंकि यहीं से 2019 के लोकसभा चुनाव का रास्ता भी तय हो सकता है। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री ने कहा कि उत्तरप्रदेश को आगे बढ़ाने में किसानों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। किसानों को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने राज्य को हर तरह से भरपूर मदद दी । लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उत्तरप्रदेश में धन का सदुपयोग नहीं हो सका । बुंदेलखंड के बारे में एक सवाल के जवाब में नकवी ने कहा कि केंद्र सरकार ने बुंदेलखंड के लिए विशेष पैकेज दिया । अब राज्य सरकार पर निर्भर करता है कि वह धन का कितना सदुपयोग करती है। उत्तरप्रदेश में जदयू ने भी अपना अभियान शुरू कर दिया है और प्रधानमंत्री के लोकसभा क्षेत्र वाराणसी में हाल ही में नीतीश कुमार की रैली भी हुई । इसके अलावा पूरे प्रदेश में जदयू ने सम्पर्क अभियान शुरू करने की बात कही है।
Saturday, 21 May 2016
Tuesday, 17 May 2016
मंजिल सैनीः मुजफ्फरनगर से हटाए जाने पर जाना चाहती थी केंद्र में
- अब लखनऊ की पहली एसएसपी बनेंगी दिल्ली में पली बढ़ी मंजिल सैनी
लखनऊ: जिस आईपीएस अधिकारी को यूपी में केवल एक शिकायत की वजह से सीएम अखिलेश यादव ने हटा दिया था उसे अब प्रदेश में सबसे महत्वपूर्ण पोस्टिंग यानी लखनऊ की एसएसपी के पद से नवाजा जा रहा है। मंजिल सैनी लखनऊ की पहली महिला एसएसपी होंगी। ये वही मंजिल सैनी हैं जिन्हें मुजफ्फरनगर से एसएसपी की पोस्ट से केवल इसलिए स्थानांतरित कर दिया गया था क्योंकि उन्होंने सूबे के कद्दावर सपा नेता आजम खां के कहने पर कुछ मुस्लिम युवकों को नहीं छोड़ा था।
- मुजफ्फरनगर दंगे के समय सीएम अखिलेश ने किया था उनका तबादला
लखनऊ: जिस आईपीएस अधिकारी को यूपी में केवल एक शिकायत की वजह से सीएम अखिलेश यादव ने हटा दिया था उसे अब प्रदेश में सबसे महत्वपूर्ण पोस्टिंग यानी लखनऊ की एसएसपी के पद से नवाजा जा रहा है। मंजिल सैनी लखनऊ की पहली महिला एसएसपी होंगी। ये वही मंजिल सैनी हैं जिन्हें मुजफ्फरनगर से एसएसपी की पोस्ट से केवल इसलिए स्थानांतरित कर दिया गया था क्योंकि उन्होंने सूबे के कद्दावर सपा नेता आजम खां के कहने पर कुछ मुस्लिम युवकों को नहीं छोड़ा था।
मुजफ्फरनगर का इतिहासः2013 के सितंबर माह में मुजफ्फरनगर में एक दोहरा हत्याकांड हुआ था और उसमें दो जाट युवकों की हत्या कुछ मुस्लिम युवकों द्वारा कर दी गई थी। इस मामले में एसएसपी मंजिल सैनी ने कुछ युवकों को उठा लिया था। ये सभी हत्या में शामिल थे, लेकिन कुछ सपा नेताओं ने आजम खां के माध्यम से सैनी पर दबाव बनाया कि वह उन्हें छोड़ दें लेकिन मंजिल ने ऐसा करने से मना कर दिया तब आजम के कहने पर न केवल एसएसपी बल्कि मुजफ्फरनगर के डीएम सुरेंद्र कुमार का भी तबादला कर दिया गया था। सुरेंद्र कुमार इन युवकों के खिलाफ रासुका जैसी कड़ी कार्रवाई के पक्ष में थे। आजम के कहने पर डीएम व एसएसपी का तबादला तो कर दिया गया लेकिन मुजफ्फरनगर दंगे की आग में घिर गया। इसके बाद वहां 63 लोग मारे गए और हजारों लोगों को घर से बेघर होने पर मजबूर होना पड़ा। मरने वालों में सबसे ज्यादा मुसलमान थे। जब मुजफ्फरनगर से मंजिल को हटाया गया था तो उन्होंने निराश होकर केंद्रीय नियुक्ति के लिए भी आवेदन किया था लेकिन राज्य सरकार ने इसकी इजाजत नहीं दी।
लखनऊ पोस्टिंगः
मंजिल सैनी की लखनऊ की एसएसपी की तौर पर तैनाती के लिए काफी नाटक हुआ। सोमवार को मंजिल सैनी को लखनऊ तैनात किए जाने का आदेश जारी हुआ लेकिन 3 घंटे बाद ही तबादला रोक दिया गया। अखिलेश सरकार ने एसएसपी राजेश पांडे को डीजीपी ऑफिस भेजते हुए उनकी जगह इटावा की एसएसपी मंजिल सैनी को लखनऊ की एसएसपी बनाने का फैसला लिया था। मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोमवार को बाकायदा ट्वीट करके मंजिल सैनी को एसएसपी लखनऊ बनाए जाने की जानकारी दी लेकिन मंजिल सैनी को राजधानी की कमान सौंपने को लेकर सोमवार रात तक ऊहापोह की स्थिति बनी रही। मंजिल को राजधानी की पहली महिला एसएसपी नियुक्त होने की बधाइयां भी मिलने लगीं थी लेकिन सोमवार की रात पौने 11 बजे शासन स्तर से मंजिल का तबादला रोक दिया गया। प्रमुख सचिव गृह देबाशीष पण्डा ने मंजिल सैनी का तबादला रोके जाने की पुष्टि की थी। इसे लेकर उहापोह की स्थिति रही और मंगलवार को दोपहर बाद स्थिति साफ हुई। यूपी गवर्नमेंट के आफिशियल ट्विटर हैंडल से मंजिल सैनी को लखनऊ की एसएसपी बनाए जाने की घोषणा हुई। इस तरह आजादी के बाद पहली बार लखनऊ में महिला एसएसपी की तैनाती हुई।
दिल्ली में पली बढ़ी हैं मंजिल सैनी
19 सितंबर 1975 को दिल्ली में जन्मी मंजिल सैनी ने अपनी पढ़ाई सेंट स्टीफेंस कॉलेज से की। इसके बाद दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनामिक्स से मंजिल ने न सिर्फ मास्टर डिग्री हासिल की बल्कि गोल्ड मेडल भी हासिल किया। वर्ष 2005 बैच की आईपीएस अधिकारी मंजिल सैनी इसके पहले इटावा, मुजफ्फरनगर, बदायंू, मथुरा समेत आधा दर्जन से ज्यादा जनपदों में बतौर पुलिस कप्तान तैनात रहीं। इटावा में वह बीते एक साल से बतौर एसएसपी तैनात थी। ट्रेनिंग पूरी करने के महज छह माह के अंदर ही मंजिल ने मुरादाबाद में तैनाती के दौरान गुडगांव के 2008 के बहुचर्चित किडनी रैकेट का भंडाफोड़ किया जिसके चलते वो सुर्खियों में आई थी। कुछ समय पहले सैफई में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उनके कामकाज की जमकर तारीफ की थी। जिसके बाद शासन स्तर पर मंजिल सैनी के एसएसपी लखनऊ बनाए जाने की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया था।
लखनऊ पोस्टिंगः
मंजिल सैनी की लखनऊ की एसएसपी की तौर पर तैनाती के लिए काफी नाटक हुआ। सोमवार को मंजिल सैनी को लखनऊ तैनात किए जाने का आदेश जारी हुआ लेकिन 3 घंटे बाद ही तबादला रोक दिया गया। अखिलेश सरकार ने एसएसपी राजेश पांडे को डीजीपी ऑफिस भेजते हुए उनकी जगह इटावा की एसएसपी मंजिल सैनी को लखनऊ की एसएसपी बनाने का फैसला लिया था। मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोमवार को बाकायदा ट्वीट करके मंजिल सैनी को एसएसपी लखनऊ बनाए जाने की जानकारी दी लेकिन मंजिल सैनी को राजधानी की कमान सौंपने को लेकर सोमवार रात तक ऊहापोह की स्थिति बनी रही। मंजिल को राजधानी की पहली महिला एसएसपी नियुक्त होने की बधाइयां भी मिलने लगीं थी लेकिन सोमवार की रात पौने 11 बजे शासन स्तर से मंजिल का तबादला रोक दिया गया। प्रमुख सचिव गृह देबाशीष पण्डा ने मंजिल सैनी का तबादला रोके जाने की पुष्टि की थी। इसे लेकर उहापोह की स्थिति रही और मंगलवार को दोपहर बाद स्थिति साफ हुई। यूपी गवर्नमेंट के आफिशियल ट्विटर हैंडल से मंजिल सैनी को लखनऊ की एसएसपी बनाए जाने की घोषणा हुई। इस तरह आजादी के बाद पहली बार लखनऊ में महिला एसएसपी की तैनाती हुई।
दिल्ली में पली बढ़ी हैं मंजिल सैनी
19 सितंबर 1975 को दिल्ली में जन्मी मंजिल सैनी ने अपनी पढ़ाई सेंट स्टीफेंस कॉलेज से की। इसके बाद दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनामिक्स से मंजिल ने न सिर्फ मास्टर डिग्री हासिल की बल्कि गोल्ड मेडल भी हासिल किया। वर्ष 2005 बैच की आईपीएस अधिकारी मंजिल सैनी इसके पहले इटावा, मुजफ्फरनगर, बदायंू, मथुरा समेत आधा दर्जन से ज्यादा जनपदों में बतौर पुलिस कप्तान तैनात रहीं। इटावा में वह बीते एक साल से बतौर एसएसपी तैनात थी। ट्रेनिंग पूरी करने के महज छह माह के अंदर ही मंजिल ने मुरादाबाद में तैनाती के दौरान गुडगांव के 2008 के बहुचर्चित किडनी रैकेट का भंडाफोड़ किया जिसके चलते वो सुर्खियों में आई थी। कुछ समय पहले सैफई में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उनके कामकाज की जमकर तारीफ की थी। जिसके बाद शासन स्तर पर मंजिल सैनी के एसएसपी लखनऊ बनाए जाने की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया था।
Monday, 16 May 2016
Thursday, 12 May 2016
बांगड़ को गाली देने का प्रीति ने किया खंडन
हुआ यह कि आख़िरी ओवर में पंजाब को जीत के लिए 17 रन बनाने थे, लेकिन वह 15 रन ही बना सकी और सिर्फ़ एक रन से हार गई। फिर क्या था डगआउट में खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ़ के सामने ही ही प्रीति जिंटा का गुस्सा फ़ूट पड़ा। दरअसल संजय बांगर ने अक्षर पटेल से पहले फरहान बेहारदीन को बल्लेबाज़ी के लिए भेज दिया। प्रीति को कोच की यह रणनीति गलत लगी। उन्होंने बांगर को हार के लिए ज़िम्मेदार ठहराते हुए यह भी कहा कि आईपीएल में पंजाब के फिसड्डी होने के लिए क्यों नहीं संजय बांगर को बर्खास्त कर दिया जाए। पंजाब की टीम अंकतालिका में 10 मैचों में 6 हार और 3 जीत के बाद सबसे नीचे है। हालांकि हार से दुखी प्रीति ने ट्वीट करके इसके लिए लक को जिम्मेदार बताया था। उन्होंने लिखा, 'जब आपका कैप्टन इतनी शानदार पारी खेले और आप हार जाएं, तो बहुत दुख होता है... कितना क्लोज गेम था... लग रहा था हार्ट अटैक ही आ जाएगा... मेरा मानना है कि हम अनलकी रहे...।
Wednesday, 11 May 2016
Cabret और Sarabjit से पहले Richa Chadha का ये हॉट अवतार
'मसान' के बाद रिचा चड्ढा की दो महत्वपूर्ण फिल्में आ रही हैं। 'कैबरे' और 'सरबजीत'। 'कैबरे' में वह पहली बार सैक्सी अवतार में नजर आएंगी और इसे उनके जीवन की सबसे अहम फिल्म माना जा रहा है। 'सरबजीत' में लीड ऐश्वर्या राय हैं लेकिन रिचा का रोल भी काफी अच्छा है। इन फिल्मों की पब्लिसिटी के लिए रिचा ने हाल ही में देश की मुख्य मैगजीन मैक्सिम के लिए फोटो शूट कराया। आप भी देखिये रिचा की ये अदाः-
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