मुजफ्फरनगरः दलित संगठनों के बवाल को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स ने साफ कर दिया है कि हिंसा का नंगा नाच नेताओं ने प्रायोजित किया था। पुलिस ने भी यह माना है कि कुछ बसपा नेताओं ने इसे अंदरखाने सपोर्ट किया। मेरठ में बसपा का पूर्व विधायक गिरफ्तार हो चुका है और मुजफ्फरनगर में दबिश जारी है। देखें खबरों ने क्या लिखाः-
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Wednesday, 4 April 2018
Saturday, 17 March 2018
विधायकों का सर्वेः मुजफ्फरनगर व शामली- 1
योगी सरकार का एक साल पूरा हो चुका है। अब आप अपने विधायकों को समझने लगे होंगे। कुछ नए हैं तो कुछ पुराने हैं।
बताइये अपने विधायकों के बारे में अपनी रायः-
1. क्या आपके विधायक ने विकास कार्यों पर ध्यान दिया है ?
2. क्या उन्होंने अपनी छवि के मुताबिक कार्य किया है?
3. क्या आपकी राय में आपके विधायक ईमानदार हैं?
4. जन समस्याओं के प्रति उनका रुख कैसा रहता है?
5. क्या आपके विधायक मिलनसार हैं, घर या दफ्तर पर समस्याएं सुनते हैं?
6. दफ्तर, आवास या फोन पर आपके विधायक की उपलब्धता के बारे में आपकी क्या राय है?
7. सोशल मीडिया (फेसबुक, टिवटर या व्हाट्स एप) पर आपके विधायक कितना एक्टिव रहते हैं?
8. चुनाव जीतने के बाद से अब तक आपके विधायक ने अपने क्षेत्र में जनसम्पर्क कैसा किया है?
9. केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के प्रति आपके विधायक कितने सजग हैं?
10. प्रदेश में चल रही योगी आदित्यनाथ सरकार की छवि को बेहतर या खराब करने में आपके विधायक की कितनी भूमिका है ?
इन बिंदुओं पर आप कितने संतुष्ट हैं। विस्तार से जवाब दें और अपने विधायक का रिपोर्ट कार्ड तैयार करने में हमारा सहयोग करें। हमारे प्रतिनिधि क्षेत्र में जाकर भी सर्वे करेंगे।
ये हैं आपके विधायक-
- कपिल देव अग्रवाल (मुजफ्फरनगर)
- अवतार सिंह भड़ाना (मीरापुर)
- विक्रम सैनी (खतौली)
- विजय कश्यप (चरथावल)
- उमेश मलिक (बुढ़ाना)
- प्रमोद ऊंटवाल (पुरकाजी)
- सुरेश राणा (थानाभवन)
- नाहिद हसन (कैराना)
- तेंजेंद्र निर्वाल (शामली)
आपको राय देनी है मुजफ्फरनगर व शामली जिले के विधायकों के बारे में।
इन्हें उपरोक्त बिंदुओं पर आप एक से दस तक अंक भी दें।
विधायकों व उनके प्रतिनिधियों से भी निवेदन है कि अपने एक साल की उपलब्धियों का विवरण हमें मेल के माध्यम से जल्द से जल्द भेज दें। जिससे कि उन्हें सर्वे में अपनी बात कहने का मौका मिल सके।
आप अपनी राय हमारे ई –मेल (newswave.in@gmail.com) पर भेज सकते हैं। हमारे फेसबुक पेज पर इनबाक्स में अपनी राय दे सकते हैं। आपकी राय गोपनीय रखी जाएगी।
विधायकों व उनके प्रतिनिधियों से भी निवेदन है कि अपने एक साल की उपलब्धियों का विवरण हमें मेल के माध्यम से जल्द से जल्द भेज दें। जिससे कि उन्हें सर्वे में अपनी बात कहने का मौका मिल सके।
आप अपनी राय हमारे ई –मेल (newswave.in@gmail.com) पर भेज सकते हैं। हमारे फेसबुक पेज पर इनबाक्स में अपनी राय दे सकते हैं। आपकी राय गोपनीय रखी जाएगी।
नोट- नतीजे अप्रैल के प्रथम सप्ताह में दिए जाएंगे।
Wednesday, 25 October 2017
नगर पालिका अध्यक्षः वैश्य व पंजाबी के बीच में फंसी भाजपा
मुजफ्फरनगरः नगर पालिका चुनाव की तैयारी शुरू हो गई है। इस बार हर लिहाज से ऐतिहासिक साबित होने जा रहे चुनावों में प्रत्याशियों का चयन बहुत ही कठिन माना जा रहा है। मुजफ्फरनगर पालिका अध्यक्ष की सीट महिला के लिए रिजर्व हो गई है और सभी राजनीतिक दलों के पास अच्छी नेताओं का अभाव है। केवल भाजपा ही ऐसी पार्टी नजर आ रही है जो किसी महिला कार्यकर्ता को मैदान में उतारने में सक्षम है। बाकी दलों की स्थिति खराब है।
अहम बात यह है कि इस बार भाजपा के सामने यह चुनौती भी है कि वह इस पद के लिए किसी वैश्य प्रत्याशी को मैदान में उतारे या पंजाबी को। पंजाबी समाज हमेशा से यह मांग करता रहा है कि विधायक वैश्य होता है तो कम से कम चेयरमैन तो पंजाबी समाज से बने। इस बार भी यही चुनौती अहम रहेगी। 2012 में हुए नगर पालिका चुनावों में भाजपा के वैश्य प्रत्याशी संजय अग्रवाल को पंजाबी समाज ने बहिष्कार कर हरीश छाबड़ा को समर्थन को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में समर्थन दे दिया था। यही वजह थी कि कांग्रेस प्रत्याशी पंकज अग्रवाल जीत हासिल करने में सफल रहे थे। इस बार भी कुछ ऐसा हो सकता है। जब से सीधे जनता चेयरमैन चुनने लगी है तब से भाजपा के बैनर पर पंजाबी समाज से जगदीश भाटिया चेयरमैन बन चुके हैं। इसके अलावा ब्राह्मण नेता सुभाष शर्मा भी चेयरमैन रहे हैं। केवल एक बार कपिल देव अग्रवाल (अब विधायक) ही वैश्य चेयरमैन रहे हैं।
भाजपा के सामने सबसे ज्यादा कठिनाई यह है कि वह अगर वैश्य प्रत्याशी को नहीं उतारती है तो वैश्य वोट किसी अन्य दल के वैश्य प्रत्याशी के पाले में जा सकते हैं। कांग्रेस, सपा व रालोद भी वैश्य प्रत्याशी उतारने की कोशिश में हैं। कहा जा रहा है कि सपा से पूर्व विधायक स्व. चितरंजन स्वरूप के बेटे गौरव स्वरूप मैदान में उतर सकते हैं। रालोद के बैनर से पायल महेश्वरी (जेल में बंद संजीव जीवा की पत्नी) तैयारी कर रही हैं। पायल को विधानसभा चुनाव में 5640 वोट भई मिले थे।
इन हालात में भाजपा के सामने बड़ी चुनौती होगी प्रत्याशी का चुनाव करना।
अहम बात यह है कि इस बार भाजपा के सामने यह चुनौती भी है कि वह इस पद के लिए किसी वैश्य प्रत्याशी को मैदान में उतारे या पंजाबी को। पंजाबी समाज हमेशा से यह मांग करता रहा है कि विधायक वैश्य होता है तो कम से कम चेयरमैन तो पंजाबी समाज से बने। इस बार भी यही चुनौती अहम रहेगी। 2012 में हुए नगर पालिका चुनावों में भाजपा के वैश्य प्रत्याशी संजय अग्रवाल को पंजाबी समाज ने बहिष्कार कर हरीश छाबड़ा को समर्थन को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में समर्थन दे दिया था। यही वजह थी कि कांग्रेस प्रत्याशी पंकज अग्रवाल जीत हासिल करने में सफल रहे थे। इस बार भी कुछ ऐसा हो सकता है। जब से सीधे जनता चेयरमैन चुनने लगी है तब से भाजपा के बैनर पर पंजाबी समाज से जगदीश भाटिया चेयरमैन बन चुके हैं। इसके अलावा ब्राह्मण नेता सुभाष शर्मा भी चेयरमैन रहे हैं। केवल एक बार कपिल देव अग्रवाल (अब विधायक) ही वैश्य चेयरमैन रहे हैं।
भाजपा के सामने सबसे ज्यादा कठिनाई यह है कि वह अगर वैश्य प्रत्याशी को नहीं उतारती है तो वैश्य वोट किसी अन्य दल के वैश्य प्रत्याशी के पाले में जा सकते हैं। कांग्रेस, सपा व रालोद भी वैश्य प्रत्याशी उतारने की कोशिश में हैं। कहा जा रहा है कि सपा से पूर्व विधायक स्व. चितरंजन स्वरूप के बेटे गौरव स्वरूप मैदान में उतर सकते हैं। रालोद के बैनर से पायल महेश्वरी (जेल में बंद संजीव जीवा की पत्नी) तैयारी कर रही हैं। पायल को विधानसभा चुनाव में 5640 वोट भई मिले थे।
इन हालात में भाजपा के सामने बड़ी चुनौती होगी प्रत्याशी का चुनाव करना।
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