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Tuesday, 3 April 2018

Survey: जानिए देश के सर्वोच्च शिक्षण संस्थानों की सरकारी रैंकिंग

नई दिल्ली: देशभर के तमाम कॉलेजों की ताज़ा NIRF रैंकिंग आ गई है और साल 2018 में इंजीनियरिंग कॉलेजों की रैंकिंग में पहला नंबर IIT मद्रास को मिला है. इस ताज़ा तरीन रैंकिंग में मैनेजमेंट कॉलेजों में पहले नंबर पर गुजरात स्थित IIM अहमदाबाद है, वहीं दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस को कॉलेजों की फेहरिस्त में पहला स्थान हासिल हुआ है.
नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) का गठन 2015 में हुआ था, जिसके तहत साल 2016 में पहली बार चार तरह की रैंकिंग की घोषणा हुई. वहीं 2017 में छह कैटेगरी में रैंकिंग की घोषणा हुई और इस साल यानी 2018 में नौ कैटेगरी में रैंकिंग की घोषणा की गई है. आपको बता दें कि ये भारत के संस्थानों का रिपोर्ट कार्ड है.
इस रैंकिंग के पैमाने दुनियाभर में सर्वश्रेष्ठ हैं. इस साल रैंकिंग में संस्थानो की भागीदारी बढ़ी है. जो संस्थान सरकारी फ़ंड लेते हैं और इस रैंकिंग में भाग नहीं लेते उनका नुक़सान होगा और ये नुक़सान किसी न किसी तरह की कटौती के रूप में होगा. सरकार चाहती है कि देश शिक्षा में अपना ब्रांड स्थापित करे. सरकार के मुताबिक शिक्षा में भारत को ग्लोबल लीडर होना है. भारत विश्व में सबसे ज़्यादा PhD पूरा करने वाला देश है लेकिन इसका विश्व ज्ञान में योगदान सिर्फ़ 0.1% है. सरकार का कहना है कि इसे बढ़ाना होगा.

देश में पहले नंबर की यूनिवर्सिटी का खिताब JNU नहीं बल्कि IISC बेंगलुरु को मिला है, वहीं राष्ट्रीय औषधि शिक्षा और अनुसंधान संस्थान, मोहाली को देश के पहले नंबर के फार्मेसी इंस्टीट्यूट का दर्जा मिला है और नंबर वन लॉ स्कूल का खिताब नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु को मिला है. यहां से आगे देखें पूरी लिस्टः -

देश के टॉप 10 इंजीनियरिंग कॉलेज
1. IIT मद्रास
2. IIT बॉम्बे
3. IIT दिल्ली
4. IIT खड़गपुर
5. IIT कानपुर
6. IIT रूड़की
7. IIT गुवाहाटी
8. अन्ना यूनिवर्सिटी चेन्नई
9. IIT हैदराबाद
10. IIT मुंबई

देश की टॉप 10 यूनिवर्सिटीज़
1. IISC बेंगलुरु
2. JNU दिल्ली
3. BHU वाराणसी
4. अन्ना यूनिवर्सिटी चेन्नई
5. यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद
6. जादवपुर यूनिवर्सिटी कोलकाता
7. दिल्ली यूनिवर्सिटी
8. अमृता विश्व विद्यापीठम कोयम्बटूर
9. सावित्रीबाई फूले पुणे यूनिवर्सिटी
10. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी


देश के टॉप 10 कॉलेज
1. मिरांडा हाउस, दिल्ली
2. सेंट स्टीफंस, दिल्ली
3. बिशप हेबर कॉलेज, तिरुचिरापल्ली
4. हिंदू कॉलेज, दिल्ली
5. प्रेसीडेंसी कॉलेज, कोलकाता
6. लोयोला कॉलेज, चेन्नई
7. श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, दिल्ली
8. लेडी श्री राम कॉलेज फॉर विमेन, दिल्ली
9. रामकृष्ण मिशन विद्यामंदिर, हावड़ा
10. मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज, चेन्नई


देश के टॉप 10 मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट
1. IIM, अहमदाबाद
2. IIM, बेंगलुरु
3. IIM, कोलकाता
4. IIM, लखनऊ
5. IIT, बॉम्बे
6. IIM, कोझिकोड
7. IIT, खड़गपुर-मैनेजमेंट स्कूल
8. IIT, मैनेजमेंट स्कूल
9. IIT, मैनेजमेंट स्कूल
10. जेवियर लेबर रिलेशन इंस्टीट्यूट


देश के टॉप 10 फार्मेसी इंस्टीट्यूट
1. राष्ट्रीय औषधि शिक्षा और अनुसंधान संस्थान, मोहाली
2. जामिया हमदर्द, दिल्ली
3. यूनिवर्सिटी इंस्टिट्यूट ऑफ़ फार्मास्यूटिकल साइंसेस, चंडीगढ़
4. इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नॉलॉजी, मुंबई
5. बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस - पिलानी
6. राष्ट्रीय औषधि शिक्षा और अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद
7. मणिपाल कॉलेज ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज, मणिपाल
8. बॉम्बे कॉलेज ऑफ फार्मेसी
9. एसवीकेएम, मुंबई
10. जेएसएस कॉलेज ऑफ फार्मेसी, मैसूर

देश के टॉप 3 लॉ इंस्टीट्यूट्स
1. नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु
2. नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली
3. नालसर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद









Thursday, 29 March 2018

क्या आप जानते हैं- मुजफ्फरनगर में किस आयु में करते हैं लड़कियां व लड़के शादी?

मुजफ्फरनगरः अपने जिले के बारे में यदि कुछ सवाल आप से पूछे जाएं तो आप बता नहीं पाएंगे। मसलन जिले का लिंगानुपात क्या है, शिक्षा का स्तर कैसा है, यहां स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति क्या है, पानी की स्थिति क्या है, यहां के युवाओं की शादी औसतन किस आयु में होती है ? आदि-आदि कई ऐसे सवाल हैं जो आप जानना चाहेंगे। पहली बार हम आपके लिए लाए हैं ये तमाम आंकड़े विस्तार से। नीति आयोग ने हाल ही में देश के सभी जिलों से यह आंकड़े जमा किए और उन्हें रेटिंग भी प्रदान की। हालांकि मुजफ्फरनगर जिला इस रेटिंग में कोई स्थान नहीं बना सका लेकिन फिर भी हमने आपकी जानकारी के लिए ये आंकड़े जुटाने का काम किया। पढ़िये विस्तार से ये सारी जानकारियाः-

राष्ट्रीय राजधानी से महज चंद मील दूर बसा हरियाणा का मेवात देश का सबसे पिछड़ा जिला है। विकास के दावों की हकीकत बयां करने वाला यह खुलासा किसी गैर सरकारी संस्था ने नहीं बल्कि खुद सरकार के शीर्ष थिंक टैंक नीति आयोग ने किया है। नीति आयोग ने शिक्षा, स्वास्थ्य व पोषण जैसे पांच क्षेत्रों के विकास के 49 मानकों पर देश के 101 पिछड़े जिलों की रैंकिंग की है जिसमें यह तथ्य सामने आया है। देश के सर्वाधिक पिछड़े 10 जिलों में से चार अकेले उत्तर प्रदेश से हैं। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने यह रैंकिंग जारी करते हुए कहा कि सरकार ने पिछड़े जिलों का कायापलट करने के लिए 101 जिलों की पहचान की है। हालांकि इन जिलों को पिछड़ा जिला न कहकर सरकार ने इन्हें 'आस्पिरेशनल डिस्टि्रक्ट' नाम दिया है। इन जिलों में केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए प्रभारी संयुक्त सचिव और अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारी भी नियुक्त किए हैं। इन जिलों में प्रगति का जायजा लेने के लिए ही नीति आयोग ने यह बेस-लाइन रैंकिंग जारी की है। एक अप्रैल से यह रैंकिंग रियल टाइम ऑनलाइन देखी जा सकेगी और मई से यह पता चल सकेगा कि किस जिले में कितनी तरक्की हुई।







Thursday, 23 November 2017

सर्वेः जानिए- मुजफ्फरनगर में क्यों बढ़ रही है कांग्रेस फिर से जीत की ओर

 न्यूजवेव-स्पेक्ट्रम मीडिया/ओपिनियन पोलः नगर पालिका चुनाव मुजफ्फरनगर


मुजफ्फरनगरः पिछले एक सप्ताह में किए गए एक सर्वे के अनुसार इस बार भी भाजपा को पालिका अध्यक्ष की कुर्सी से वंचित रहना पड़ सकता है। सर्वे के अनुसार, कांग्रेस की रालोद समर्थित उम्मीदवार अंजू अग्रवाल को बढत मिलती नजर आ रही है।

90 प्रतिशत वैश्य मतदाता अंजू अग्रवाल के समर्थन में ख़ड़े नजर आ रहे हैं। खासतौर से नई मंडी में उन्हें भारी समर्थन मिल रहा है। 

अंजू अध्यक्ष पद के लिए अकेली वैश्य उम्मीदवार हैं। मुजफ्फरनगर में वैश्य मतों की संख्या सबसे ज्यादा है। निवर्तमान चेयरमैन पंकज अग्रवाल की चाची होने का लाभ भी अंजू को मिल रहा है। पंकज ने अपने कार्यकाल में खूब कार्य कराए थे और वैश्य मतदाताओं में उनकी पकड़ है।

भाजपा प्रत्याशी सुधाराज शर्मा को केवल ब्राह्मणों मत ही मिलते नजर आ रहे हैं। कुछ पंजाबी मत व कुछ वैश्य मत भी उन्हें मिल सकते हैं। इसके अलावा उनका कोई जनाधार नहीं नजर आता।  

85 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता भी अंजू अग्रवाल की ओर झुकाव दिखाते नजर आए। दरअसल मुस्लिम मतदाता उसे वोट करते हैं जो भाजपा को हरा सके। ऐसे में अंजू का ही पलड़ा भारी माना जा रहा है।

सपा की प्रत्याशी मिथलेश पाल का शहर में कोई जनाधार नहीं रहा है। वे पहले भी कई बार चुनाव हार चुकी हैं। ऐसे में वैश्य मतदाता और मुस्लिम मतदाता की वे पहली पसंद नहीं बन पा रही हैं।

वैश्य वोटर बड़ी संख्या में कांग्रेस प्रत्याशी की ओर जा रहा है। सपा जिलाध्यक्ष गौरव स्वरूप खुद वैश्य समाज से जुड़े होने के बावजूद यह पलायन नहीं रोक पा रहे हैं। भाजपा के विधायक कपिल देव अग्रवाल पूरा प्रयास कर रहे हैं कि भाजपा की ओर वैश्य वोटर जाएं लेकिन उनकी मेहनत रंग लाती नहीं नजर आ रही है।
बसपा की मुस्लिम प्रत्याशी का कमजोर होना भी कांग्रेस के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। कांग्रेस प्रत्याशी को मजबूत मानकर मुस्लिम वोटर उसकी ओर जाते नजर आ रहे हैं।

26 नवम्बर को यहां मतदान होना है।