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Monday, 11 June 2018

#SamparkForSamarthan में मुजफ्फरनगर भाजपा जीरो, सांसद विदेश गए

मुजफ्फरनगरः भाजपा इस समय पूरे देश में एक महत्वपूर्ण अभियान #SamparkForSamarthan चला रही है। इसके जरिए सारे नेता अपने संपर्क में आने वाले खास लोगों से मिल रहे हैं और उन्हें भाजपा सरकार की 4 साल की उपलब्धियों से अवगत करा रहे हैं। खुद अमित शाह ने इसकी बड़े पैमाने पर शुरूआत की। वे कपिल देव, कुलदीप नैयर, माधुरी दीक्षित, रतन टाटा जैसी हस्तियों से मिले। केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने वीवीएस लक्ष्मण, सानिया मिर्जा, पुलेला गोपीचंद, पीवी सिंधू से मुलाकात की। अन्य नेता भी ऐसा कर रहे हैं। यह कार्यक्रम निचले स्तर तक चलाया जा रहा है।
मुजफ्फरनगर से लगने वाले संसदीय क्षेत्रों मेरठ के सांसद राजेंद्र अग्रवाल व बागपत के सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह ने भी अपने इलाके के गणमान्य लोगों से मुलाकात की लेकिन मुजफ्फरनगर में यह अभियान परवान नहीं चढ़ पाया है। इसकी प्रमुख वजह है संगठन की खराब स्थिति। बताया जा रहा है कि पार्टी संगठन में फेरबदल होने की खबरें हैं और जिला अध्यक्ष बदले जा सकते हैं। विधायकगण अपनी मस्ती में मस्त हैं और किसी की खबर नहीं ले रहे हैं।
जिले से जुड़े रहे दिल्ली के एक वरिष्ठ पत्रकार ने जब फेसबुक के माध्यम से यह सवाल सांसद संजीव बालियान से जोड़ते हुए उठाया तो पता चला कि सांसद महोदय 15 जून तक अमेरिका में हैं। ऐसे में यह अभियान कैसे चलेगा ? तमाम आसार बता रहे हैं कि कैराना लोकसभा उपचुनाव के बाद मुजफ्फरनगर में भाजपा की हालत कितनी खराब है। मुजफ्फरनगर के बारे में तो कहा जा रहा है कि भाजपा इस बार लोकसभा सीट पर चुनाव हारने जा रही है।

यहां जाट समाज में भी संजीव बालियान के खिलाफ नाराजगी है। दूसरे वर्ग भी उनसे नाराज हैं। विधायक कपिल देव अग्रवाल केवल अपने निकटस्थ लोगों के चक्कर में ही लगे रहते हैं। ऐसे में संगठन नीचे की ओर जा रहा है। यहां से रिपोर्ट हाईकमान को भेजी गई है कि यहां न उच्च वर्ग भाजपा जनप्रतिनिधयों से खुश है और न मध्यम वर्ग और न किसान व दूसरा गरीब तबका। ऐसे में क्या संपर्क होगा और क्या चुनाव जीता जाएगा।    











Thursday, 7 June 2018

कैराना के नतीजे के बाद संजीव बालियान का भविष्य ?

नई दिल्लीः  कैराना लोकसभा उपचुनाव में हारने के बाद वेस्ट यूपी में भाजपा में अब यह चर्चा जोर पर है कि जाट मतदाताओं को कैसे हैंडल किया जाए ? साथ ही हाईकमान को यह भी  रिपोर्ट मिली है कि मुजफ्फरनगर सांसद डॉ. संजीव बालियान व उनके समर्थक जाटों को भाजपा से जोड़ने में विफल रहे हैं। सोशल मीडिया पर खबरें वायरल हो रही हैं कि संजीव बालियान को जाटों के गांवों का जिम्मा सौंपा गया था कि वे भाजपा की प्रत्याशी मृगांका सिंह के लिए जाटों के वोट जुगाड़ें। रात दिन संजीव क्षेत्र में रहे लेकिन जाटों ने पहली पसंद अजित सिंह की रालोद को ही बनाया। संजीव बालियान समर्थक अब सोशल मीडिया पर एक सात पेज की सूची (नीचे देखें) प्रचारित कर रहे हैं जिसमें दिखाया गया है कि जाटों के बहुल वाले सुन्ना, भभीसा, एलम, भारसी, लिसाढ़, किवाना, झाल, लिलोन आदि में भाजपा को 2017 के विधानसभा चुनाव से ज्यादा वोट मिले हैं। 






इस लिस्ट को सोशल मीडिया पर तो प्रचारित कर दिया गया लेकिन किसी भी अखबार ने इन्हें छापने से मना कर दिया। मीडिया के साथ संजीव बालियान के संबंध वैसे ही खराब हैं। अब हाईकमान में कोई भी यह मानने के लिए तैयार नहीं है कि यह सात पेज की सूची सही है। इसके मुताबिक जाट बहुल इलाकों में 2017 में भाजपा को 25395 वोट  मिले थे जबकि 2018 के उपचुनाव में 25755  मिले। 


इसके विपरीत दैनिक जागरण में प्रकाशित (ऊपर) एक अन्य खबर के मुताबिक जाट बहुल बूथों पर भाजपा से ज्यादा रालोद को पसंद किया गया। अब संजीव बालियान तुलना भाजपा को मिले मतों से करा रहे हैं जबकि भाजपा इससे परेशान है कि रालोद को उससे ज्यादा वोट मिले। इसके संकेत यह हैं कि रालोद आने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा को कैराना, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, बागपत, अमरोहा, मथुरा आदि लोकसभा सीटों पर परेशान कर सकती है। 

संजीव बालियान के बारे में ये भी पढ़ें--


जहां तक संजीव बालियान का मामला है तो वे जाटों के नेता बनने के चक्कर में न तो जाटों के नेता बन सके और न दूसरी बिरादरियों के। अगर हालत यही रही तो लोकसभा चुनाव में वे खुद भी हार सकते हैं। सुनने में आ रहा है कि अजित सिंह मुजफ्फनगर से उतरने की तैयारी कर रहे हैं। 






Sunday, 22 April 2018

मुजफ्फरनगर में भाजपा सांसद व विधायक की हो रही थू थू

शिव चौक पर भाजपा नेता 
  मुजफ्फरनगरः नगर में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान ने भाजपा जनप्रतिनिधिय़ों के लिए कठिन हालात पैदा कर दिए हैं। रविवार को भगत सिंह रोड पर भाजपा नेता सुनील तायल व अन्य व्यापारियों पर पुलिस ने लाठियां बरसाईं और बाद में सिटी मजिस्ट्रेट व पुलिस अफसरों को मिनाक्षी चौक पर मुस्लिम नेताओं ने मालाएं पहनाकर उनका स्वागत किया। इससे जिले के भाजपाई खुद को बेहद अपमानित महसूस कर रहे हैं। भाजपा नेताओं में सांसद संजीव बालियान और नगर विधायक कपिल देव के खिलाफ भारी आक्रोश है। रविवार को जब पिटाई से आहत होकर व्यापारी शिव चौक पर धरना दे रहे थे तो दोनों नेता वहां पहुंचे। इस दौरान दोनों के खिलाफ नारेबाजी हुई और हाय-हाय सुनने को मिली। हालांकि दोनों नेताओं ने आश्वासन दिया कि इस मामले में दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी लेकिन भाजपा कार्यकर्ता इससे संतुष्ट नहीं हैं। मामले की शिकायत सीएम योगी आदित्यनाथ तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।


मौके पर पहुंचे संजीव बालियान व पिटाई का शिकार भाजपा नेता। 
 पिछले कुछ दिनों से नगर पालिका व प्रशासन ने शहर के तंग इलाकों में अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया हुआ है। शनिवार को भगत सिंह रोड पर अतिक्रमण हटाने के लिए जब सिटी मजिस्ट्रेट, पालिका अधिकारी पुलिस के साथ पहुंचे थे तो भारी हंगामा हुआ था। पीर के निकट स्थित कुमार गारमेंट्स के मालिक ने अपनी दुकान को तोड़े जाने पर हंगामा किया था। इसी बीच खबर मिलने पर विधायक कपिल देव वहां पहुंच गए। व्यापारियों का पूरा गुस्सा कपिल पर फूट गया। उनके साथ हाथापाई तक की गई। एक व्यापारी ने तो कपिल पर जूता भी फेंक दिया। कपिल बड़ी मुश्किल से निकल पाए थे।

अफसरों का सम्मान करते मुस्लिम नेता। 
रविवार को फिर वहीं काम हुआ। भगत सिंह रोड पर सब्जी मंडी के निकट सुनील तायल नामक भाजपा नेता की पुलिसवालों ने जबर्दस्त पिटाई की। उसके कपड़े तक फट गए। इस पर व्यापारियों में रोष व्याप्त हो गया और सब शिव चौक पर जमा हो गए और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे। यहां कपिल देव व संजीव बालियान पहुंचे तो उनके खिलाफ भी नारेबाजी हुई। सबका कहना था कि भाजपा के राज में भाजपाई पिट रहे हैं और दूसरे समुदाय के लोग अफसरों को मालाएं पहना रहे हैं। दोनों नेताओं ने सबको आश्वासन दिया लेकिन व्यापारी संतुष्ट नहीं हुए। भाजपा के वरिष्ठ नेता श्रीमोहन तायल का कहना था कि उनके साथ ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर ने गलत व्यवहार किया था कुछ माह पहले लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। व्यापारियों का प्रदर्शन तो शाम तो खत्म हो गया लेकिन नेताओं के खिलाफ आक्रोश खत्म नहीं हुआ। माना जा रहा है कि कुछ नेता इस मामले को लेकर लखनऊ भी जा रहे हैं।
(for advt. - newswave.in@gmail.com ) 

Saturday, 16 December 2017

संजीव बालियान, सुरेश राणा, संगीत सोम व उमेश मलिक के खिलाफ गैरजमानती वारंट


 मुजफ्फरनगरः एक स्थानीय अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री सुरेश राणा, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बाल्यान, भाजपा विधायक संगीत सोम और उमेश मलिक के खिलाफ साल 2013 के मुजफ्फरनगर दंगा मामले में गैर-जमानती वारंट जारी किए हैं। इनके खिलाफ मुकदमा चलाने की राज्य सरकार की इजाजत के बाद अदालत ने वारंट जारी किए हैं। विशेष जांच समिति (एसआईटी) के अधिकारियों के अनुसार अतिरिक्त मुख्य न्यायाधीश मजिस्ट्रेट मधु गुप्ता ने कल ताजा गैर जमानती वारंट जारी करते हुए आरोपियों से 19 जनवरी 2018 को अदालत में पेश होने के लिए कहा। एसआईटी ने आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 153 ए के तहत कथित तौर पर घृणा भाषण देने के संबंध में मुकदमा चलाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार से अनुमति  मांगी थी और सरकार ने इसकी अनुमति दे दी।       आरोपियों पर आरोप है कि इन लोगों ने एक महापंचायत में हिस्सा लिया था और अगस्त 2013 के अंतिम सप्ताह में भाषण के जरिए ङ्क्षहसा भड़काई। इसके अलावा आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है।  मुजफ्फरनगर और इसके आसपास के इलाकों में साल 2013 के अगस्त और सितंबर महीने में सांप्रदायिक झड़पें हुई थी। इस हिंसा में 60 लोगों की मौत हो गई थी और 40,000 से ज्यादा विस्थापित हो गए थे।       


Monday, 11 December 2017

संजीव बालियान, कपिल देव व रुपेंद्र सैनी के खिलाफ हुई पार्टी

मुजफ्फरनगरः सांसद संजीव बालियान और सदर विधायक कपिल देव अग्रवाल के खिलाफ भाजपा जिला संगठन में भारी आक्रोश है। हाल ही में निकाय चुनाव में भाजपा की करारी हार की वजह इन दोनों नेताओं के साथ-साथ जिलाध्यक्ष रुपेंद्र सैनी को भी जिम्मेदार माना जा रहा है। संगठन से जुड़े नेताओं ने हाईकमान को अलग-अलग तरीके से अपना विरोध भेज दिया है। माना जा रहा है कि जल्द ही संगठन में भी बदलाव होंगे।

गौरतलब है कि मुजफ्फरनगर जिले में दो ही नगर पालिका हैं- मुजफ्फरनगर और खतौली। दोनों में ही भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है। माना जा रहा है कि सैनी, बालियान व कपिल की तिकड़ी ने ही पार्टी की किरकिरी कराई है। दोनों ही टिकट गलत घोषित किए गए। मुजफ्फरनगर में सुधाराज शर्मा को टिकट दिए जाने से संगठन में भारी हलचल हुई। पार्टी के खिलाफ ही धरना दिया पार्टी की महिला नेताओं ने। सभासदों को टिकट भी गलत बांटे गए। ज्यादातर प्रत्याशी हार गए। 50 में से 16 ही भाजपा के सभासद बने। ये सब शर्मनाक रहा। अब संगठन के पुराने नेताओं ने हाईकमान से शिकायत की है कि जिले में ऐसा दबंग जिलाध्यक्ष बनाया जाए तो कपिल देव व संजीव बालियान की जोड़ी के बढ़ते प्रभाव को तोड़ सके। क्योंकि इन दोनों ने पार्टी को हाईजैक कर लिया है और मनमानी कर रहे हैं। 

Friday, 10 November 2017

इस महिला नेता को पैर पकड़ कर मनाया संजीव बालियान ने

मुजफ्फरनगरः भाजपा में नाराजगी का दौर जारी है। नगर पालिका चुनाव के लिए अध्यक्ष व सभासदों के पद के लिए टिकटों को बांटने में गड़बड़ हुई है यह तो सब मान रहे हैं लेकिन अब डैमेज कंट्रोल कैसे हो इसे लेकर प्रयास भी तेज हो रहे हैं। भाजपा ने मुजफ्फरनगर में सुधा राज शर्मा (पत्नी अरविंद राज शर्मा ) को टिकट दिया तो बवाल हो गया। टिकट की इंतजार में खड़ी दर्जनों महिला नेताओं ने नाराजगी जाहिर करते हुए शिव चौक पर दिन रात धरना शुरू कर दिया। सांसद संजीव बालियान व विधायक कपिल देव पर आरोप लगे कि दोनों ने पैसे लेकर टिकट बेच दिया है। पूर्व विधायक सुशीला अग्रवाल व भाजपा की पुरानी नेता सरिता अरोरा ने तो बागी तेवर दिखाते हुए पर्चा ही दाखिल कर दिया।
सुशीला के पैर पकड़ते संजीव बालियान। 
निकाय चुनाव की तैयारी के लिए भावना पैलेस बैंकेट हाल में पार्टी की मीटिंग हुई तो वहां कुछ पुराने कार्यकर्ताओं ने सिर पर जूता तक मारा और लानत दी कि पार्टी की 40 साल की वफादारी का ये सिला मिला उन्हें? ऐसे में दबाव संजीव बालियान पर सबसे ज्यादा बढ़ गया है। डेढ़ साल बाद उन्हें भी लोकसभा चुनाव फेस करना है और वे नहीं चाहते कि कोई बवाल हो। इसी के मद्देनजर उन्होंने रूठों को मनाने का सिलसिला शुरू कर दिया है।
सरिता अरोरा को मिठाई खिलाते अरविंद राज शर्मा
इसी क्रम में वे सुशीला अग्रवाल के घर पहुंचे और उन्हें नाम वापस लेने के लिए मना लिया। संजीव बालियान ने सहृदयता दिखाते हुए सुशीला के पैर पकड़ लिए और कहा कि जब तक आप नहीं मानेंगी तब तक वे नहीं जाएंगे। बताया जाता है कि संजीव की इस हठ के सामने सुशीला को झुकने को मजबूर होना पड़ा।
दूसरी ओर अरविंद राज शर्मा ने सरिता अरोरा को मिठाई खिलाकर मना लिया। बहरहाल अभी सभासद के टिकटों की नाराजगी दूर होनी बाकी है। इसका लाभ कांग्रेस की प्रत्याशी अंजू अग्रवाल को मिल सकता है। वैश्य प्रत्याशी अकेली मैदान में है। उनके भतीजे पंकज अग्रवाल निवर्तमान चेयरमैन भी हैं और उन्होंने शहर में बढ़िया काम कराया था।
सभासद का टिकट मांग रहे वरिष्ठ भाजपा नेता श्यामलाल गुप्ता ने खुद को मारने के लिए जूता निकाल लिया। क्या संजीव बालियान इनके भी पैर पकड़ने जाएंगे? ऐसा लोगों की नाराजगी भाजपा का महंगी पड़ सकती है। 

Monday, 6 November 2017

संजीव बालियान व कपिल देव पर पैसे लेने का आरोप

गुस्साई महिला भाजपा नेताओं ने फूंके दोनों के शिव चौक पर पुतले


पालिका अध्यक्ष पद के लिए टिकट में अरविंद राज शर्मा से पैसे लेने का लगाया आरोप 

मुजफ्फरनगरः
नगर पालिका चुनाव में पुराने भाजपा कार्यकर्ताओं की उपेक्षा करके नए प्रत्याशी को टिकट दिए जाने के खिलाफ जिला भाजपा में उबाल है। पूर्व केंद्रीय मंत्री व मुजफ्फरनगर सांसद डॉ. संजीव बालियान व सदर विधायक कपिल देव पर सबका निशाना है। भाजपा की महिला नेताओं ने सोमवार को शिव चौक पर दोनों के पुतले फूंके। इनका आरोप था कि इन दोनों नेताओं ने पैसे लेकर नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए टिकट भाजपा नेता अरविंद राज शर्मा की पत्नी सुधा शर्मा को दिलवा दिया है। 

गौरतलब है कि पहली बार मुजफ्फरनगर सीट महिला के लिए रिजर्व हुई है। ऐसे में उन महिला नेताओं को भी आशा जगी थी जो 15-20 साल से पार्टी के लिए काम कर रही हैं। इनमें से कई तो टिकट की प्रबल दावेदार थीं। शिवचौक पर पुतला फूंकने वालों में पूर्व विधायक सुशीला अग्रवाल, एकता गुप्ता, सरिता अरोरा, सरिता गौड़, साधना आदि प्रमुख थीं। सब जानते हैं कि अरविंद राज शर्मा ने 2012 में बसपा के टिकट पर मुजफ्फरनगर सदर सीट से चुनाव लड़ा था और हार गए थे। इसके बाद वे भाजपा में आए थे। महिला नेताओं का आरोप था कि उनकी पत्नी कभी राजनीति में नहीं रही। न कभी पार्टी की मीटिंग में आती हैं। ऐसे में अचानक उनके टिकट का ऐलान कैसे हो गया। इसके लिए सबने संजीव बालियान व कपिल देव की जोड़ी को ही जिम्मेदार ठहराया। सबने खुलेआम आरोप लगाया कि दोनों ने पैसे लेकर यह टिकट कराया है।
नाराज महिला नेताओं के बीच कपिल देव व संजीव बालियान भी पहुंचे। 
इस रोष से यह तो तय है कि भाजपा इस सीट को हार सकती है। वैश्य समाज भी नाराज है। पिछले दो चुनाव से यहां वैश्य चेयरमैन बनते रहे हैं। पंजाबी समाज की भी उपेक्षा की गई है। ऐसे में सपा प्रत्याशी मिथलेश पाल की जीत के आसार प्रबल हो रहे हैं।
सुधा राज शर्मा टिकट मिलने के बाद अपने परिजनों के बीच। 
शिव चौक पर पुतला दहन की सूचना मिलते ही अपने समर्थकों के साथ पहुंचे बीजेपी के प्रत्याशी नगर पालिका के उम्मीदवार सुधा शर्मा के पति अरविंद राज शर्मा। अरविंद राज शर्मा ने बीजेपी की महिला मोर्चा की कार्यकर्ता को समझाने का प्रयास किया कि वह सदैव आपके साथ है और बीजेपी के हाईकमान ने जो भी फैसला किया है वह सोच समझकर किया है।लेकिन बीजेपी की महिला मोर्चा ने नहीं मानी उनकी बात और उन का कड़ा विरोध किया । भाजपा मुर्दाबाद के नारे भी लगाए।

Saturday, 9 September 2017

अब छवि बदलने की मुहिम में जुटे संजीव बालियान

मुजफ्फरनगरः सांसद संजीव बालियान ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटाए जाने के बाद जनता के बीच जाने के क्रम को आगे बढ़ाया है। पिछले एक सप्ताह में वे जनता के बीच गए हैं। व्यस्तताएं कम होने का लाभ भी मिल रहा है।
संजीव केंद्रीय मंत्री के रूप में उतना समय भी नहीं दे पा रहे थे। उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र में होने वाली रस्म तेरहवीं, कथाओं, गोष्ठियों में भाग लेने का क्रम तेज किया है। उनके निकटस्थ सूत्रों का कहना है कि संजीव की टीम के खास सदस्यों ने यह महसूस किया कि तीन साल के अपने कार्यकाल में संजीव बालियान केंद्र में मंत्री होने के कारण क्षेत्र के लोगों से उस तरह का संपर्क नहीं रखा पाए। अब उनके पास समय है तो वे जनता के बीच जा रहे हैं। वे लोगों के घर पर चाय पीने भी जा रहे हैं। इसे उनके लिए अच्छा माना जा रहा है। 

हालांकि पार्टी सूत्रों का कहना है कि संजीव के व्यवहार को लेकर सबकी शिकायतें रही हैं और उन्हें इसे दूर करना होगा नहीं तो उन्हें 2019 के चुनाव के समय दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। कहा जा रहा है कि मोदी अपने कुछ सांसदों का टिकट भी काट सकते हैं। इसके लिए सभी सांसदों का रिपोर्ट कार्ड भी तैयार किया जा रहा है। संघ से भी यह रिपोर्ट ली जा रही है कि सांसद जनता के बीच जा रहे हैं या नहीं। ऐसे में संजीव बालियान का एक्टिव होना भी लाजिमी है। खैर देर आए दुरुस्त आए।

दूसरी ओर राजनीतिक हलकों में यह भी कहा जा रहा है कि संजीव बालियान के लिए 2019 में टिकट फिर से ले पाना भी सरल नहीं होगा। उनकी पार्टी में कई मजबूत दावेदार पैदा हो चुके हैं। कहा जा रहा है कि बुढ़ाना के विधायक उमेश मलिक अगली बार लोकसभा का चुनाव लड़ने का दावा पेश करने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में संजीव के सामने खुद को दावेदारी को मजबूती से बनाए रखना सरल नहीं होगा।

कुछ लोगों का कहना है कि संजीव केवल जाट नेता ही बनकर रह गए हैं लेकिन अब संजीव सभी वर्गों के लोगों से संपर्क कर रहे हैं। वे विधायक कपिल देव के साथ पंजाबी व वैश्य वर्ग के लोगों से मिल रहे हैं और उनसे संपर्क बढ़ा रहे हैं।




Tuesday, 5 September 2017

पार्टी संगठन भी साथ नहीं संजीव बालियान के ?

मुजफ्फरनगरः संजीव बालियान अब केंद्रीय मंत्री नहीं रहे। जिले में उनके बारे में मोदी द्वारा लिए गए इस फैसले को लेकर अलग-अलग तरीके से देखा जा रहा है। कोई कह रहा है कि सही हुआ तो कोई कह रहा है गलत हुआ लेकिन कुल मिलाकर जिले के लिए यह क्षति है। खास बात यह है कि जिला भाजपा संगठन में भी अंदरखाने इस बात को लेकर खुशी मनाने वालों की कमी नहीं है। संगठन का कोई भी पदाधिकारी संजीव के समर्थन में बोलने के लिए तैयार नहीं है।

संगठन के कई पदाधिकारी उन्हें लेकर खुद को असहज महसूस कर रहे थे। कुछ लोगों का कहना था कि संजीव का व्यवहार उनके साथ सम्मानजनक नहीं रहा। जब पूरा संगठन पिछले विधानसभा चुनाव के समय कपिल देव अग्रवाल को टिकट दिए जाने का विरोध कर रहा था तो संजीव ने उनका समर्थन कर टिकट दिलवाया था। इसके अलावा बिजनौर जिले के एक भाजपा विधायक के साथ उन्होंने हाल ही में बहुत ही गलत तरीके से व्यवहार किया। इसकी शिकायत भी हाईकमान तक पहुंची थी।

संजीव व उनके साथ रहने वाले समर्थकों ने कई मौकों पर जिला संगठन के पदाधिकारियों की अनदेखी की। अगर किसी ने मिलने का प्रयास किया तो उसे मिलने नहीं दिया गया। कोई भी बहाना बना दिया गया। संगठन के एक पदाधिकारी ने बताया कि मंत्री जी के निजी सचिव हमेशा ही उनके बिजी रहने का बहाना बना दिया करते थे। कई बार घर पर होते हुए भी मंत्री जी कार्यकर्ताओं से नहीं मिलते थे। ऐसे में संगठन का कोई भी पदाधिकारी उनका समर्थन करेगा ही नहीं। इस पदाधिकारी ने कहा कि यदि आप पार्टी में अंदरुनी तौर पर सर्वे करा लें तो संजीव के समर्थन में 100 में से 10 वोट भी नहीं आएंगे। अब संगठन में उनकी स्थिति ऐसी होगी तो कैसे कोई साथ खड़ा होगा ?

Saturday, 2 September 2017

और इस वजह से केबिनेट से बाहर कर दिए गए संजीव बालयान

नई दिल्ली/मुजफ्फरनगरः मुजफ्फरनगर सांसद डॉ. संजीव बालयान अब केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं हैं। उनके इस्तीफे के साथ ही शनिवार को बागपत के जाट सांसद वे मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर सत्यपाल सिंह को मंत्रिपरिषद में शामिल किए जाने की घोषणा कर दी गई। संजीव से पहले ही इस्तीफा लिया जा चुका है।

सूत्रों के अनुसार, संजीव बालियान का कई विवादों में फंस जाना उनके लिए घातक साबित हुआ। पहले उन्हें कृषि राज्य मंत्री बनाया गया था और फिर एक साल पहले उन्हें जल संसाधन राज्य मंत्री बनाया गया था। बताया जाता है कि उनकी अपने सीनियर मंत्रियों (राधा मोहन सिंह व उमा भारती) से सही ट्यूनिंग नहीं बैठ रही थी। उन्होंने खुद को वेस्ट यूपी में जाट लीडर के रूप में स्थापित करने की कवायद शुरू कर दी थी। वे जाट आरक्षण के लिए भी प्रयास करने लगे थे जो मोदी व अमित शाह को पसंद नहीं था।

इसके अलावा पिछले दिनों मुजफ्फरनगर में एक महिला द्वारा आत्महत्या करने के मामले में संजीव बालियान के एक समर्थक का नाम आने के समय भी पार्टी को बदनामी का सामना करना पड़ा था। हालांकि संजीव ने बार बार यह कहा था कि वह आरोपी को नहीं जानते हैं लेकिन जब मीडिया ने उनकी व आरोपी की संयुक्त फोटो प्रकाशित की तो सब कुछ साफ हो गया। पीडिता के परिजनों ने आरोप लगाया था कि संजीव अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर इस केस के दबाने की कोशिश कर रहे हैं। यह प्रकरण उनके लिए घातक साबित हुआ।
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इससे पहले भी संजीव कई तरह के विवाद में फंसते रहे हैं। न्यूजवेव ने एक साल पहले भी एक स्टोरी में उनका विभाग बदले जाने के समय खुलासा किया था। उसे आप यहां पढ़ सकते हैः-



EXCLUSIVE: संजीव बालियान: 10 बड़ी गलतियां जो उनसे हुई


प्रमोशन देने के बजाय मोदी ने बदल दिया विभाग मुजफ्फरनगर सांसद का
जानिये उनके खिलाफ पार्टी की तैयार की गई फीडबैक रिपोर्ट की अंदरूनी बातें 

नई दिल्लीः केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री और मुजफ्फरनगर के सांसद संजीव बालियान के मंत्रालयों में अचानक किया गया बदलाव वेस्ट यूपी के इस तेजी से उभरते जाट नेता के लिए धक्के के समान है। उनके समर्थकों में निराशा का माहौल है। जल संसाधन, नदी विकास व गंगा सफाई जैसे विभागों को संजीव को दिया गया है। इनमें से कुछ उमा भारती के पास हैं। इससे पहले संजीव बालियान कैबिनेट मंत्री राधा मोहन ङ्क्षसह के साथ राज्यमंत्री के रूप में कृषि विभाग देख रहे थे। संजीव के समर्थकों में निराशा इसलिए भी है क्योंकि वह लोग उम्मीद लगाए बैठे थे कि उन्हें इस कैबिनेट रिशफल में प्रमोट किया जा रहा है। माना जा रहा था कि उन्हें स्वतंत्र प्रभार वाला मंत्री बनाया जा सकता है। पर ऐसा नहीं हुआ। 30 जून को जब मोदी ने सभी मंत्रियों से उनके विभागों का लेखा जोखा मांगा और समीक्षा की तो उनकी फाइल में कई ऐसे तथ्य थे जो उनके पक्ष में नहीं थे। सूत्रों के अनुसार, संगठन की ओर से भी उनकी ट्रैक रिकार्ड की फाइल दी गई थी और अमित शाह व उनकी टीम को जो फीडबैक मिला था उससे कुछ ये बातें निकलकर सामने आई:-

1 - संजीव बालियान मोदी सरकार के दूसरे मंत्रियों की तरह सोशल मीडिया पर निष्क्रिय पाए गए। कुछ महीने पहले भी जब मोदी ने भाजपा सांसदों की बैठक ली थी तो उसमें सभी से उनके फेसबुक पेज व ट्विटर हैंडल के बारे में मोदी व अमित शाह ने पड़ताल की थी। कई सांसदों ने तो महीनों से अपने फेसबुक पेज को अपडेट नहीं किया था। इसके अलावा संजीव बालियान को ट्विटर पर निष्क्रिय पाया गया। जिन सांसदों के फोन में नरेंद्र मोदी एप नहीं मिली उन्हें भी चेतावनी दी गई थी। कहा जा रहा है कि संजीव बालियान के मोबाइल में भी पीएम मोदी की एप नहीं थी। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। इस बात को लेकर मोदी व अमित शाह ने नाराजगी जताई थी। दोनों का ही मानना था कि जब मंत्री परिषद के सदस्य ही अपने मोबाइल में उनकी एप नहीं डालेंगे तो आम आदमी से क्या उम्मीद की जा सकती है।

2 - सोशल मीडिया विंग की ओर से भी रिपोर्ट दी गई कि संजीव बालियान का फेसबुक पेज बहुत ही कम अपडेट हो रहा है और उसके माध्यम से जो सूचनाएं उन्हें दी जा रही हैं उन पर ध्यान नहीं दिया जाता। कई बार गलत तस्वीरें भी शेयर कर दी गई। ये भी तथ्य सामने आया कि उनके फेसबुक पेज को उनका कोई रिश्तेदार ही हैंडल कर रहा है और उन्हें ट्विटर के संबंध में कोई खास जानकारी नहीं है। हालांकि मोदी व शाह के साथ उक्त बैठक के बाद संजीव ने अपने ट्विटर हैंडल को एक्टिव करने का प्रयास भी किया और अपने फेसबुक पेज के माध्यम से अपील भी जनता से की गई कि वे आप सब लोग उन्हें ट्विटर पर फालो कर सकते हैं लेकिन रिस्पांस नहीं आया। उनके फालोअर 4000 के आसपास ही निकले जो केंद्रीय मंत्री के हिसाब से बहुत कम है।

3 - अमित शाह एंड टीम को संजीव बालियान का अति महत्वाकांक्षी होना भी नहीं भा रहा था। बताया जाता है कि संजीव बालियान के समर्थकों ने उन्हें यूपी में सीएम के रूप में प्रोजेक्ट करने के लिए मुहिम चलाई हुई है। इसके लिए सोशल मीडिया पर खूब लिखा जा रहा है। कुछ फेसबुक कम्युनिटी पेज भी उनके समर्थन में बना दिए गए। इन पर लगातार लिखा जा रहा था कि संजीव बालियान को यूपी में सीएम पद के लिए प्रोजेक्ट किया जाए। इस बारे में कुछ वेबसाइट्स ने न्यूज भी चलाई और ये बात हाईकमान तक पहुंच गई। हालांकि संजीव बालियान ने अपने जवाब में ये कहा कि ये पेज उन्होंने नहीं बनाए हैं लेकिन फिर भी मैसेज यही था कि ये उनके समर्थकों की कोशिश है जिसे उनका अप्रत्यक्ष समर्थन प्राप्त है। हाईकमान ने इसे अपने ऊपर बेवजह का दबाव माना।

4 - संजीव बालियान लोकसभा चुनाव में चार लाख से भी अधिक मतों से जीते थे मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से, लेकिन फिर भी वे केवल जाटों के हितों में ही काम कर रहे हैं। जबकि उन्हें सभी बिरादरियों ने समर्थन दिया था। इससे ठाकुर, वैश्य, सैनी, त्यागी व अन्य बिरादरी के लोग नाराज हैं। यूपी के एक ठाकुर विधायक ने संजीव बालियान के खिलाफ लिखित शिकायत पार्टी हाईकमान को दी थी। इसके बारे में अमित शाह ने उन्हें ताकीद भी किया। कहा जाता है कि वे जब भी अपने लोकसभा क्षेत्र में जाते हैं तो उनके आसपास जाट नेताओं का ही जमावड़ा रहता है। उनका ज्यादातर समय भी जाट बहुल गांवों में ही गुजरता है जबकि भाजपा अगले साल के विस चुनाव के मद्देनजर सभी बिरादरियों पर फोकस कर रही है।
5 - संजीव बालियान, केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह (जो बिहार से आते हैं) के साथ राज्यमंत्री के रूप में दो साल से भी अधिक समय से कार्य कर रहे थे लेकिन कहा जाता है कि उनकी अपने सीनियर के साथ कभी भी वर्किंग ट्यूनिंग नहीं बन सकी। इस बारे में राधा मोहन सिंह ने भी हाईकमान को अवगत कराया था। यही वजह रही कि अंत में उनका विभाग बदल दिया गया। जबकि राधा मोहन उन गिने चुने मंत्रियों में बने रहे जिनके विभाग नहीं बदले गए।

6 - संजीव बालियान के बारे में जिला संगठन व प्रदेश संगठन की ओर से भी रिपोर्ट सकारात्मक नहीं आ रही थी। उनके बारे में कहा जाने लगा है कि उनके विकास कार्यों में कोई एकरूपता नहीं है। जो भी बड़े-बड़े विकास कार्य उन्होंने कराए हैं वे केवल बुढ़ाना (उनके लोकसभा क्षेत्र की एक विस सीट) क्षेत्र में ही कराए हैं। इसके अलावा दूसरे हिस्सों में वे विकास कार्यों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। खासतौर से मुजफ्फरनगर जिला मुख्यालय, खतौली, चरथावल, सरधना आदि विस इलाके लगातार उनकी शिकायतें कर रहे थे।

7 - मीडिया के साथ भी संजीव बालियान की ट्यूनिंग सही नहीं बताई गई। उनके बारे में फीडबैक दिया गया कि वे नेशनल मीडिया व टीवी चैनल्स के पत्रकारों को तो तवज्जो दे रहे थे लेकिन उनके लोकसभा क्षेत्र मुजफ्फरनगर की मीडिया का एक बड़ा वर्ग उनसे नाराज है और इसलिए उनकी खबरें भी नहीं छापता है। पार्टी का मानना है कि इससे संगठन को नुकसान होता है। मीडिया के साथ अच्छे संबंध पार्टी की पहली प्राथमिकता है।

8 - जून माह में मुजफ्फरनगर में हुए किसान सम्मेलन के लिए संजीव बालियान ने विशेष प्रयास किए थे। इसमें केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू व जयंत सिन्हा आदि भी मुजफ्फरनगर के सिसौली गांव में गए थे लेकिन इस सम्मेलन में कई गड़बडिय़ां भी हो गई। संजीव ने इस सम्मेलन में भारतीय किसान यूनियन को शामिल कर लिया। जबकि भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत चौधरी अजित सिंह की पार्टी रालोद से लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। इसके अलावा सम्मेलन के लिए गए राष्ट्रीय नेताओं के लिए सुबह के नाश्ते का इंतजाम जिले के कुछ व्यापारियों के यहां किया गया। ये व्यापारी कांग्रेस से जुड़े रहे हैं और इनमें से एक व्यापारी का करोड़ों रुपया हाल ही में पंजाब में आयकर विभाग ने जब्त कर लिया था। इसके अलावा पिछले विधानसभा चुनाव के समय इन व्यापारियों (बिंदल ब्रदर्स) ने हरियाणा के कांग्रेस सांसदों नवीन जिंदल व दीपेंद्र हुड्डा की मेजबानी की थी। ये सब बातें हाईकमान को नागवार गुजरी। संगठन ने भी इस बारे में अपनी रिपोर्ट हाईकमान को भेजी। कहा गया कि इन व्यापारियों से सम्मेलन के लिए आर्थिक मदद भी ली गई जो संगठन के लिए नाराजगी की वजह बनी।

9 - संजीव बालियान पर शुरू से ही भाई भतीजावाद के आरोप भी लगते रहे हैं। मोदी ने शुरू में ही साफ कर दिया था कि कोई भी मंत्री अपने किसी रिश्तेदार को अपने स्टाफ में नहीं रखेगा। इसके बावजूद संजीव बालियान ने अपने भाई को ही अपना पीए बनाए रखा। उनके फोन तक उनका भाई ही उठाता है। यही नहीं उन्होंने अपने कुछ रिश्तेदारों को गलत तरीके से लाभ पहुंचाने की कोशिश भी की। उन्होंने अपने अधिकृत मेल आईडी से एक ईमेल कुछ कारपोरेट घरानों के लिए कर दिया जिसमें लिखा गया था कि वे उनकी एक रिश्तेदार लड़की के लिए बिजनेस सेटअप में सहायता करें। ये खबर इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने प्रमुखता से भी छापी और मोदी सरकार को अपमानित होना पड़ा। इस प्रकरण पर मोदी ने बहुत ही गंभीरता से संज्ञान लिया। इसके अलावा संजीव के बारे में कहा जा रहा है कि वे अपने कुछ बिजनेस पार्टनरों को राजनीति में उतारने के लिए प्रयासरत हैं। ये सभी जाट ही हैं। किसी को मीरापुर से टिकट दिलाने का प्रयास कर रहे हैं तो किसी को बुढ़ाना व चरथावल विधानसभा सीट से। यही नहीं हाल ही में जब मुजफ्फरनगर में विधानसभा का उपचुनाव हुआ तो उन्होंने कपिल देव के लिए टिकट करवाया। कपिल भी बसपा प्रत्याशी मैदान में न होने के बावजूद भी बहुत ही कम अंतर से जीत सके। यही नहीं बाद में कपिल देव स्टिंग आपरेशन में फंसे और पार्टी की किरकिरी भी हुई।


10 - मोदी की कैबिनेट में जो भी बदलाव 5 जुलाई को किए गए हैं उनके बारे में कहा जा रहा है कि मोदी को कम बोलने वाले व निर्विवादित लोग पसंद आ रहे हैं। यही वजह है कि स्मृति ईरानी को एचआरडी जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय से कपड़ा मंत्रालय में जाना पड़ा। मोदी चाहते हैं कि उनके मंत्री काम पर ध्यान दें और बेकार के विवादों में न पड़ें। संजीव बालियान भी विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं। दादरी कांड के समय उन्होंने कई विवादित बयान दिए इसके अलावा यूपी में संजीव लगातार वहां के कैबिनेट मंत्री आजम खां के खिलाफ बयानबाजी करते रहे। मोदी ने इसे भी अनावश्यक माना। इसके अलावा जाट आरक्षण आंदोलन के समय भी संजीव बालियान ने कुछ ऐसी टिप्पणियां की जो मोदी को नागवार गुजरी। संजीव का जाटों को आरक्षण दिलाने के लिए अति सक्रिय रहना भी मोदी को पसंद नहीं आया और अंत में मोदी ने उन्हें दूसरे किसी हल्के विभाग में काम करने के लिए नियुक्त कर दिया।