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Thursday, 31 May 2018

कैराना उपचुनावः भाजपा की हार के जिम्मेदार ये 3 नेता

नई दिल्ली/शामलीः कैराना लोकसभा सीट पर भाजपा की करारी हार के साथ ही पार्टी में यह मंथन शुरू हो गया है कि इस हार का कारण क्या रहा ? भाजपा कार्यकर्ताओं में रोष तो है ही साथ ही अपने लोकल बड़े नेताओं के प्रति नाराजगी भी है। भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि मुजफ्फरनगर के भाजपा सांसद डॉ. संजीव बालियान, यूपी के गन्ना मंत्री सुरेश राणा (जो थानाभवन से विधायक हैं और थानाभवन विधानसभा सीट कैराना लोकसभा सीट का ही हिस्सा है) और सहारनपुर के वरिष्ठ भाजपा नेता व यूपी सरकार में आयुष मंत्री धर्म सिंह सैनी का इस हार में बड़ा योगदान है। सैनी नकुड़ विधानसभा सीट से विधायक हैं और यह भी कैराना का ही हिस्सा है। वे लगातार तीसरी बार विधायक हैं। बसपा सरकार में भी वे मंत्री थे और उन्होंने 2017 के चुनाव के समय ही भाजपा ज्वाइन की थी। इन तीनों नेताओं पर ही पार्टी ने सबसे ज्यादा भरोसा किया हुआ था और ये भाजपा को अपने बल पर वोट दिलाने में विफल रहे।

कैराना का परिणामः
तबस्सुम बेगम (रालोद) 421145 मत

मृगांका सिंह (भाजपा) 371691 मत

अंतर- 49545

संजीव बालियान- पहले से ही निशाने पर हैं भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के, पढिए यह स्टोरी

फिलहाल पार्टी में मंथन का दौर शुरू हो गया है। पहला विचार यही सामने आ रहा है कि न तो संजीव बालियान जाटों के वोट दिलवा सके और न ही दूसरे वर्गों की। थानाभवन में भी भाजपा को सबसे कम वोट मिले और यही हाल नकुड़ में रहा। एक भाजपा नेता ने बताया कि प्रचार के दौरान ही साफ हो गया था कि इन तीनों नेताओं का ही अपने इलाकों पर कोई नियंत्रण नहीं है। 

संजीव ने पार्टी को भरोसा दिलाया था कि वे जाटों को फिर से अजित सिंह की ओर नहीं लौटने देंगे। इसी प्रकार राणा व सैनी ने थानाभवन व नकुड़ विधानसभा क्षेत्रों की गारंटी ली थी लेकिन सब फेल रहे। थानाभवन में तो सुरेश राणा ने किसी बड़े नेता या सीएम योगी की रैली भी नहीं होने दी। राणा ने पार्टी हाईकमान को भरोसा दिलाया था कि वे अपने इलाके से भारी समर्थन भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह को दिलवाएंगे। पर ऐसा नहीं हुआ। सबसे कम वोट भाजपा को थानाभवन से ही मिले हैं। अभी आंकड़े एकत्र किए जा रहे हैं और जैसे ही फाइनल फीगर आ जाएगी आपको विधानसभा वार आंकड़े दिए जाएंगे।




कैराना लोकसभा उपचुनाव

पांचों विधानसभाओं के आंकड़े


शामली
लोकदल 77159
भाजपा 77571
312 से भाजपा आगे रही

थाना भवन
लोकदल 88539
भाजपा 73334
लोकदल 15205 से आगे रही

कैराना
लोकदल 79378
भाजपा 93195
भाजपा 13817 से आगे रही


गंगोह (सहारनपुर)
लोकदल 108411
भाजपा 96141
लोकदल 12370 से आगे रही

नकुड़ (सहारनपुर) 
लोकदल 114341
भाजपा 86224
लोकदल 18117 से आगे रही 

उपरोक्त आंकड़े साफ कर रहे हैं कि थानाभवन व नकुड़ में भाजपा की करारी हार हुई। जबकि कैराना विधानसभा, जहां से तबस्सुम बेगम का बेटा नाहिद हसन सपा विधायक है, में रालोद की करारी हार हुई। यहां गुर्जर समाज ने मृगांका के लिए जमकर वोटिंग किया। शामली विधानसभा में भी भाजपा आगे रही। ऐस में सुरेश राणा व धर्म सिंह सैनी पर गाज भी गिर सकती है। 


Wednesday, 18 April 2018

MLA Survey-1 : मुजफ्फरनगर-शामली का सबसे लोकप्रिय विधायक कौन ?

विधायकों के सर्वे के नतीजे आने शुरू हो चुके हैं। योगी सरकार का एक साल पूरा होने के मौके पर न्यूजवेव ने स्पेक्ट्रम मीडिया के साथ मिलकर जो सर्वे कराया उसके मुताबिक मुजफ्फरनगर व शामली जिले के नौ विधायकों की रैंकिंग का काम शुरू हो चुका है। हम इसका बिंदुवार खुलासा करेंगे। अभी फीडबैक आ रहा है और उनका हम विश्लेषण कर रहे हैं। फिलहाल कुछ बिंदुओं पर रायशुमारी साफ हो गई है। जिन पर सर्वे पूरा हो चुका है उनका विवरण इस प्रकार हैः- 

पहला सवालः आप अपने विधायक को 10 में से कितने नंबर देंगे?

कपिल देव अग्रवाल (मुजफ्फरनगर) – 4

प्रमोद उंटवाल (पुरकाजी)- 5

विजय कश्यप (चरथावल)- 6

उमेश मलिक (बुढ़ाना) – 4

अवतार भड़ाना (मीरापुर)- 4

विक्रम सैनी (खतौली)- 3

सुरेश राणा (थानभवन) – 7

तेजेंद्र निर्वाल (शामली)- 5

नाहिद हसन (कैराना)- 5

(इस सवाल में सभी वर्गों की रैंक के आधार पर औसत अंक निकालकर रैंक दी गई है) 


दूसरा सवालः आपके विधायक को क्षेत्र में कराए गए विकास कार्यों के हिसाब से एक से दस अंक में रैंक कीजिए।

कपिल देव अग्रवाल (मुजफ्फरनगर) – 3

प्रमोद उंटवाल (पुरकाजी)- 4

विजय कश्यप (चरथावल)- 6

उमेश मलिक (बुढ़ाना) – 3

अवतार भड़ाना (मीरापुर)- 2

विक्रम सैनी (खतौली)- 4

सुरेश राणा (थानभवन) – 5

तेजेंद्र निर्वाल (शामली)- 4

नाहिद हसन (कैराना)- 6 

तीसरा सवालः जनसमस्याओं के प्रति आपके विधायक कितन सजग हैं? आपने कोई समस्या बताई तो उसका समाधान होता है या नहीं? एक से दस तक रैंक कीजिए।

कपिल देव अग्रवाल (मुजफ्फरनगर) – 5

प्रमोद उंटवाल (पुरकाजी)- 4

विजय कश्यप (चरथावल)- 4

उमेश मलिक (बुढ़ाना) – 3

अवतार भड़ाना (मीरापुर)- 3

विक्रम सैनी (खतौली)- 4

सुरेश राणा (थानभवन) –6

तेजेंद्र निर्वाल (शामली)- 4

नाहिद हसन (कैराना)- 4

(इस श्रेणी में सभी विधायकों का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। कुछ चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आए। इनका खुलासा हम आने वाली किश्तों में करेंगे।)
खेद का विषय यह है कि किसी भी विधायक ने अपने एक साल के कामकाज का लेखाजोखा हमें उपलब्ध नहीं कराया। बाद में फिर ये लोग आलोचना करेंगे कि हमने पक्षपात किया। आगे भी इस सर्वे के अन्य बिंदुओं का खुलासा आपके लिए किया जाता रहेगा। यह सिलसिला मई माह तक चलेगा।

feedback- newswave.in@gmail.com

Saturday, 16 December 2017

संजीव बालियान, सुरेश राणा, संगीत सोम व उमेश मलिक के खिलाफ गैरजमानती वारंट


 मुजफ्फरनगरः एक स्थानीय अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री सुरेश राणा, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बाल्यान, भाजपा विधायक संगीत सोम और उमेश मलिक के खिलाफ साल 2013 के मुजफ्फरनगर दंगा मामले में गैर-जमानती वारंट जारी किए हैं। इनके खिलाफ मुकदमा चलाने की राज्य सरकार की इजाजत के बाद अदालत ने वारंट जारी किए हैं। विशेष जांच समिति (एसआईटी) के अधिकारियों के अनुसार अतिरिक्त मुख्य न्यायाधीश मजिस्ट्रेट मधु गुप्ता ने कल ताजा गैर जमानती वारंट जारी करते हुए आरोपियों से 19 जनवरी 2018 को अदालत में पेश होने के लिए कहा। एसआईटी ने आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 153 ए के तहत कथित तौर पर घृणा भाषण देने के संबंध में मुकदमा चलाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार से अनुमति  मांगी थी और सरकार ने इसकी अनुमति दे दी।       आरोपियों पर आरोप है कि इन लोगों ने एक महापंचायत में हिस्सा लिया था और अगस्त 2013 के अंतिम सप्ताह में भाषण के जरिए ङ्क्षहसा भड़काई। इसके अलावा आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है।  मुजफ्फरनगर और इसके आसपास के इलाकों में साल 2013 के अगस्त और सितंबर महीने में सांप्रदायिक झड़पें हुई थी। इस हिंसा में 60 लोगों की मौत हो गई थी और 40,000 से ज्यादा विस्थापित हो गए थे।