मुजफ्फरनगरः सांसद डॉ. संजीव बालियान के रिपोर्ट कार्ड की पहली किश्त पर भारी
संख्या में प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। कुछ मेल भी प्राप्त हुए हैं। कुछ ने कहा है
कि हमने जान बूझकर संजीव बालियान के बारे में नकारात्मक रिपोर्ट दी है। जबकि बहुत बड़ी
संख्या में लोगों ने माना है कि रिपोर्ट सौ प्रतिशत सही है। यहां हम बताना चाहते हैं
कि ये केवल एक अनुमानित रिपोर्ट है। इसमें कुछ सैंपल सर्वे किए गए और उन्हीं के आधार
पर निष्कर्ष निकालने का प्रयास किया गया।
हमारा प्रयास है कि हम निष्पक्ष तरीके इस पूरी रिपोर्ट को आपके सामने पेश करें। ‘स्पेक्ट्रम मीडिया नेटवर्क’ की टीम ने मौके पर जाकर सांसद की रिपोर्ट को तैयार किया। दूसरे भाग में हम पेश कर रहे हैं सांसद के पैतृक गांव कुटबी व गोद लिए गांव रसूलपुर जाटान की एक संक्षिप्त रिपोर्टः-
1. सर्वे में सामने आया है कि सांसद संजीव बालियान के पैतृक गांव कुटबी में बिजली सप्लाई में बहुत सुधार आया है। पहले यहां छह-सात घंटे से ज्यादा बिजली नहीं आती थी। जब से संजीव बालियान सांसद बने हैं तो यहां 15 घंटे तक बिजली आती है। कुटबी गांव के पास ही कुटबा गांव भी मौजूद है और वहां बिजलीघर मौजूद है। कुटबी में बिजली चलती रहती है जबकि आसपास के गांव अंधेरे में पड़े रहते हैं। इसकी वजह से संजीव बालियान को निंदा का भी सामना करना पड़ रहा है। टीम के सर्वे में 80 प्रतिशत लोगों का ये मानना था कि संजीव बालियान भले ही अपने गांव में बिजली दिलाने में सफल रहे हों लेकिन मुजफ्फरनगर जिले में बिजली की हालत बेहद खराब है। जिला मुख्यालय पर बिजली की कटौती पूर्व के वर्षों के हिसाब से ही हो रही है। यानी संजीव बालियान के केंद्रीय मंत्री बनने का लाभ इस क्षेत्र में तो कम से कम जिले के लोगों को नहीं मिला है।
2. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी जनप्रतिनिधियों से एक-एक गांव गोद लेने के लिए कहा था। इसके बाद संजीव बालियान ने रसूलपुर जाटान गांव को गोद लिया था। यहां की रिपोर्ट सबसे ज्यादा खराब है। हालांकि यहां काम कराने के लिए केंद्रीय मंत्री ने प्रयास किए हैं लेकिन अभी कोई भी कार्य पूरा नहीं हुआ है। इसके अलावा लोगों का कहना था कि ये गांव उतना पिछड़ा भी नहीं था। जाट बहुल इस गांव को गोद लेने के लिए भी संजीव निशाने पर हैं। लोगों का कहना है कि बेहतर होता कि संजीव किसी दलित गांव को गोद लेते। खुद संजीव समर्थकों की राय है कि यदि संजीव बालियान ने किसी दलित गांव को गोद लिया होता तो इससे दलितों के बीच उनकी लोकप्रियता बढ़ती। दलितों ने पिछले चुनाव में भाजपा के समर्थन में जमकर वोटिंग की थी।
3. रसूलपुर जाटान को लेकर एक और रिपोर्ट सामने आई है। बताया जाता है कि संजीव बालियान ने इस गांव में उच्च प्रजाति का गन्ने का बीज भारी मात्रा में लोगों को उपलब्ध कराया था। यहां पर संजीव समर्थकों ने उन्हें शर्मिंदा कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इससे ज्यादा बुरी स्थिति और क्या हो सकती थी कि गन्ने का ये महंगा बीज गन्ने के सेंटर पर शुगर मिल के लिए बिकता हुआ पकड़ लिया गया। यानी जो गन्ना बोने के लिए लाया गया था उसे चीनी मिल को बेचा जा रहा था। इस प्रकरण की वजह से संजीव बालियान व उनके समर्थकों को काफी अपमानित होना पड़ा।
हमारा प्रयास है कि हम निष्पक्ष तरीके इस पूरी रिपोर्ट को आपके सामने पेश करें। ‘स्पेक्ट्रम मीडिया नेटवर्क’ की टीम ने मौके पर जाकर सांसद की रिपोर्ट को तैयार किया। दूसरे भाग में हम पेश कर रहे हैं सांसद के पैतृक गांव कुटबी व गोद लिए गांव रसूलपुर जाटान की एक संक्षिप्त रिपोर्टः-
1. सर्वे में सामने आया है कि सांसद संजीव बालियान के पैतृक गांव कुटबी में बिजली सप्लाई में बहुत सुधार आया है। पहले यहां छह-सात घंटे से ज्यादा बिजली नहीं आती थी। जब से संजीव बालियान सांसद बने हैं तो यहां 15 घंटे तक बिजली आती है। कुटबी गांव के पास ही कुटबा गांव भी मौजूद है और वहां बिजलीघर मौजूद है। कुटबी में बिजली चलती रहती है जबकि आसपास के गांव अंधेरे में पड़े रहते हैं। इसकी वजह से संजीव बालियान को निंदा का भी सामना करना पड़ रहा है। टीम के सर्वे में 80 प्रतिशत लोगों का ये मानना था कि संजीव बालियान भले ही अपने गांव में बिजली दिलाने में सफल रहे हों लेकिन मुजफ्फरनगर जिले में बिजली की हालत बेहद खराब है। जिला मुख्यालय पर बिजली की कटौती पूर्व के वर्षों के हिसाब से ही हो रही है। यानी संजीव बालियान के केंद्रीय मंत्री बनने का लाभ इस क्षेत्र में तो कम से कम जिले के लोगों को नहीं मिला है।
2. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी जनप्रतिनिधियों से एक-एक गांव गोद लेने के लिए कहा था। इसके बाद संजीव बालियान ने रसूलपुर जाटान गांव को गोद लिया था। यहां की रिपोर्ट सबसे ज्यादा खराब है। हालांकि यहां काम कराने के लिए केंद्रीय मंत्री ने प्रयास किए हैं लेकिन अभी कोई भी कार्य पूरा नहीं हुआ है। इसके अलावा लोगों का कहना था कि ये गांव उतना पिछड़ा भी नहीं था। जाट बहुल इस गांव को गोद लेने के लिए भी संजीव निशाने पर हैं। लोगों का कहना है कि बेहतर होता कि संजीव किसी दलित गांव को गोद लेते। खुद संजीव समर्थकों की राय है कि यदि संजीव बालियान ने किसी दलित गांव को गोद लिया होता तो इससे दलितों के बीच उनकी लोकप्रियता बढ़ती। दलितों ने पिछले चुनाव में भाजपा के समर्थन में जमकर वोटिंग की थी।
3. रसूलपुर जाटान को लेकर एक और रिपोर्ट सामने आई है। बताया जाता है कि संजीव बालियान ने इस गांव में उच्च प्रजाति का गन्ने का बीज भारी मात्रा में लोगों को उपलब्ध कराया था। यहां पर संजीव समर्थकों ने उन्हें शर्मिंदा कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इससे ज्यादा बुरी स्थिति और क्या हो सकती थी कि गन्ने का ये महंगा बीज गन्ने के सेंटर पर शुगर मिल के लिए बिकता हुआ पकड़ लिया गया। यानी जो गन्ना बोने के लिए लाया गया था उसे चीनी मिल को बेचा जा रहा था। इस प्रकरण की वजह से संजीव बालियान व उनके समर्थकों को काफी अपमानित होना पड़ा।

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