मुजफ्फरनगर के सांसद डॉ. संजीव बालियान ने पिछले एक साल
में केंद्रीय मंत्री के रूप में मोदी सरकार व भाजपा में भले ही अपनी मजबूत पकड़ बनाई
हो लेकिन उनकी जिले में स्थिति में गिरावट आई है। उनके काम को लेकर जिले में मिश्रित
प्रतिक्रयाएं मिली हैं। ‘न्यूजवेव व स्पेकट्रम मी़डिया नेटवर्क’ ने इस बारे में पिछले
एक महीने में एक विशेष सर्वे किया जिसमें संजीव बालियान ज्यादातर क्षेत्रों में दस
में से पांच या छह अंक ही हासिल कर सके।
संजीव बालियान ने 2012 में राजनीति में कदम रखा था। हरियाणा
के हिसार में पशु चिकित्सक की नौकरी से इस्तीफा देने के बाद संजीव मेरठ में रीयल स्टेट
के कारोबार में थे। वहां उनकी मुलाकात मेरठ के भाजपा नेता (अब पार्टी के उत्तर प्रदेश
अध्यक्ष) डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी से हुई और वे भाजपा से जुड़ गए। 2012 में संजीव ने
अपने गांव कुटबी में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी व राजनाथ सिंह की एक विशाल
रैली का आयोजन करके अपनी दमदार उपस्थिति का अहसास कराया। उसी समय से संजीव मुजफ्फरनगर
लोकसभा सीट से टिकट के दावेदार बन गए थे।
शुरू में जिला पार्टी में उनका विरोध भी हुआ लेकिन अपने
व्यवहार की वजह से वे स्वीकार्यता कायम करने में सफल हुए। 2013 में मुजफ्फरनगर में
सांप्रदायिक दंगा हुआ तो संजीव बालियान को भड़काऊ भाषण देने के इल्जाम में जेल में
भी जाना पड़ा। ये भी उनके लिए एक प्लस प्वाइंट साबित हुआ और वे हाईलाइट हो गए। इस बीच
उनके विरोध में पार्टी में खेमेबंदी भी हुई। भाजपा से जुड़े कुछ जाट नेताओं ने उनका
विरोध किया और कहा कि वे नए हैं इसलिए इतनी आसानी से उन्हें टिकट नहीं दिया जाना चाहिए।
यहां संघ के साथ संजीव के नजदीकी संबंध काम आए और वे टिकट लेने में सफल रहे।
टिकट मिलने के साथ ही संजीव बालियान को विजेता के रूप
में देखा जाने लगा था। मोदी लहर, मुजफ्फरनगर का दंगे के बाद मतों का ध्रुवीकरण व संजीव बालियान की मेहनत रंग
लाई और वे लोकसभा चुनाव चार लाख से भी अधिक मतों के अंतर से जीतने में सफल रहे। डॉ.
संजीव बालियान की कामयाबी सबके लिए चौंकाने वाली थी। संजीव की किस्मत उस समय चमक उठी
जब उन्हें मोदी सरकार के गठन के समय केंद्रीय मंत्रिमंडल में स्थान दे दिया गया। उन्हें
कृषि राज्य मंत्री का पोर्टफोलियो दिया गया। तभी से संजीव बालियान मोदी सरकार का एक
अहम हिस्सा हैं।
संजीव की मोदी सरकार में पोजिशन को लेकर कभी कोई संदेह
नहीं रहा है लेकिन किसी भी मंत्री की सफलता व विफलता का आकलन उसकी लोकसभा सीट पर कराए
गए विकास कार्यों से ही किया जाता है। एक साल पूरा होने के मौके पर अलग-अलग सर्वे कंपनियों
ने मीडिया हाउसों के सहयोग से कई तरह के आकलन किए। न्यूजवेव ने भी अपनी पुरानी सहयोगी
संस्था ‘स्पेक्ट्रम मीडिया नेटवर्क’ के जरिये मुजफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र में पड़ने
वाले विधानसभा क्षेत्रों (बुढ़ाना, मुजफ्फरनगर, चरथावल, सरधना [ जिला मेरठ] व खतौली) में जाकर ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की। इस रिपोर्ट
को हम किश्तों में आपके सामने विस्तार से रखेंगे।
सर्वे के बाद सामने आए कुछ बिंदुओं के अनुसारः-
70 % लोगों का मानना है कि डॉ. संजीव बालियान पर्याप्त
विकास कार्य कराने में विफल रहे। हालांकि संजीव बालियान का पैतृक गांव कुटबी चरथावल
विधानसभा का हिस्सा है लेकिन संजीव बालियान का मुख्य इलाका भौगोलिक नजरिये से बुढ़ाना
विधानसभा के निकट ही पड़ता है। इस इलाके के ही ज्यादातर लोगों की राय में संजीव बालियान
उनकी अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर रहे हैं।
आंकड़ों के हिसाब से संजीव बालियान ने अब तक 2.5 करोड़
रुपये के विकास कार्य अपने संसदीय निधि से कराए हैं। इस तरह से प्रत्येक विधानसभा में
50-50 लाख रुपये हिस्से में आते हैं। एक साल के लिहाज से ये बहुत कम है। इसलिए जहां
भी हमारी टीम पहुंची रिपोर्ट नकारात्मक ही मिली है।
90 % लोगों की राय में संजीव बालियान मुजफ्फरनगर जिले
में जाटों के नेता बनने का प्रयास कर रहे हैं। वे केवल जाट समुदाय के लोगों से ही घिरकर
रह गए हैं। हालांकि हमारी टीम ने उन गांवों के जाट बिरादरी के लोगों से भी बात की जिनमें
उनका अक्सर आना-जाना होता है लेकिन वे भी उनसे संतुष्ट नहीं नजर आए। जो लोग उन पर जाटों
की राजनीति करने का आरोप लगाते मिले उनका ये तर्क था कि संजीव बालियान ने जितने भी
विकास कार्य कराए हैं वे सभी जाट ठेकेदारों के जरिये ही कराए हैं।

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