नई दिल्लीः पश्चिमी उत्तर प्रदेश में
अब तक अपराधों के लिए बदनाम मुजफ्फरनगर जिले को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का हिस्सा
बनाया जा रहा है। इस खबर से मुजफ्फरनगर जिले में खुशी की लहर दौड़ गई है। मंगलवार
को होने वाली नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड (एनसीआरपीबी) की बैठक में इस पर मुहर
लगा दी जाएगी। इसके लिए मुजफ्फरनगर के सांसद व केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री
डॉ.संजीव बालयान को श्रेय दिया जा सकता है। वे इसके लिए पैरवी कर रहे थे।
किसी शहर को एनसीआर में शामिल किए
जाने का एकदम कोई लाभ नहीं होता है, लेकिन इससे उन क्षेत्रों में विकास की
संभावनाएं जरूर बढ़ जाती हैं। मुजफ्फरनगर को एनसीआर में शामिल करने के लिए
केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री डॉ. संजीव बालयान (जो मुजफ्फरनगर से सांसद भी हैं) ने
प्रयास किए थे। उनका कहना था कि जब करनाल और अलवर, जो दिल्ली से क्रमश: 150 व 175 किमी की दूरी पर हैं, को एनसीआर का हिस्सा बनाया जा सकता है तो मुजफ्फरनगर को क्यों नहीं?
इसके अलावा शामली (वेस्ट यूपी का मुजफ्फरनगर से अलग होकर
बना जिला) के कांग्रेस विधायक पंकज मलिक ने भी इस तरह का प्रस्ताव भेजा था। मार्च
महीने में उत्तर प्रदेश सरकार ने भी अपनी सहमति से केंद्र को अवगत करा दिया था।
एनसीआरपीबी के पूर्व सचिव नूर
मोहम्मद का कहना है कि एनसीआर में किसी भी शहर के शामिल हो जाने से कोई बहुत
ज्यादा फायदा नहीं होता। पिछले कई साल से हम रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम की बात
करते रहे हैं, जिससे कि एनसीआर से जुड़े शहरों के
बीच रेल से आवागमन तेज हो सकते, लेकिन इस योजना
ने आज तक साकार रूप नहीं लिया है। इसके अलावा एनसीआर में वे तमाम सुविधाएं होनी
चाहिए तो दिल्ली में मिलती हैं लेकिन इसके लिए भी ज्यादा प्रयास करने होंगे। अगर
शिक्षा-स्वास्थ्य के क्षेत्र में आप कुछ नहीं कर सकते हैं तो फिर एनसीआर का कोई
फायदा नहीं।
बता दें, एनसीआरपीबी का गठन 1985 में हुआ था।
इसका उद्देश्य आसपास के शहरों में ऐसा माहौल देना था जिससे कि आने वाले समय में
दिल्ली पर दबाव कम हो सके। जो लोग इन शहरों में रहते हैं वे आसानी से दिल्ली में
काम करने तो आएं लेकिन नौकरी करके वापस अपने घरों को लौट जाएं। इसके लिए उन्हें
मैट्रो व ऐसी ही दूसरी तेज गति ट्रेन आदि की सुविधा दी जाए। पर ऐसा हो नहीं पाया
है। इसकी वजह एनसीआरपीबी के पास ताकत का अभाव। ये किसी भी राज्य को निर्देशित नहीं
कर सकती है।
एनसीआर में शामिल अन्य शहर:
हरियाणा- फरीदाबाद, गुडगांव, मेवात, रोहतक, सोनीपत, रेवाड़ी, झज्जर, पानीपत, पलवल, महेंद्रगढ़, भिवानी, जींद और करनाल।
उत्तर प्रदेश- मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर,
बुलंदशहर, हापुड़ और बागपत।
राजस्थान- अलवर और भरतपुर।

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